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क्यों कहते हैं श्रीकृष्ण को “काली कमली वाला”? इसके पीछे छिपी है राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की अद्भुत कथा… 🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 वृंदावन की पावन भूमि पर एक दिन बड़ा विचित्र दृश्य देखने को मिला। जो कन्हैया हर समय हँसते-खेलते रहते थे, जो गोपियों के मटके फोड़ते और ग्वालबालों के साथ वन में क्रीड़ा करते थे… वही नटखट लाला उस दिन अचानक उदास हो गए। उनकी आँखों की चमक मानो कहीं खो गई थी। यह देखकर माँ यशोदा का हृदय घबरा उठा। उन्होंने लाला को गोद में उठाया और चिंता से बोलीं— “अरे मेरे लाल को क्या हो गया? किसकी नज़र लग गई मेरे कन्हैया को?” वृंदावन की स्त्रियाँ और बुजुर्ग भी इकट्ठा हो गए, पर किसी को समझ नहीं आया कि लाला अचानक इतने उदास क्यों हो गए। तभी नंदगाँव की एक वृद्ध पुरोहितानी ने धीरे से कहा— “मैया… यह साधारण बीमारी नहीं है। कन्हैया को किसी की बुरी नज़र लग गई है। अगर बरसाने की राधा का कोई पुराना वस्त्र इन्हें पहना दिया जाए, तो नज़र तुरंत उतर जाएगी।” माँ यशोदा के लिए अपने लाल से बढ़कर कुछ भी नहीं था। उन्होंने एक पल भी देर नहीं की। ना सर्दी की चिंता की, ना दूरी की… बस तुरंत बरसाने की ओर चल पड़ीं। ⸻ 🌸 बरसाने में हुआ अद्भुत दृश्य जब यशोदा मैया बरसाने पहुँचीं, तो वहाँ कीर्ति माता से विनम्रता से बोलीं— “बहन, मेरे लाला को बहुत बुरी नज़र लग गई है। अगर आपकी लाली राधा का कोई पुराना कपड़ा मिल जाए तो शायद मेरे कन्हैया की नज़र उतर जाए।” कीर्ति माता थोड़ी संकोच में पड़ गईं। उन्होंने कहा— “अरे मैया! नंद बाबा तो हमारे लिए राजा समान हैं। हम अपनी बेटी का पुराना कपड़ा आपको कैसे दे सकते हैं?” उसी समय अंदर खड़ी राधा रानी यह सब सुन रही थीं। उनके अधरों पर हल्की मुस्कान आ गई। वे बाहर आईं और प्रेम से बोलीं— “श्याम सुंदर को नज़र लगे… यह मैं कैसे सह सकती हूँ? उनके लिए मैं पुराना वस्त्र ही नहीं… अपने प्राण भी अर्पित कर सकती हूँ।” उस समय ठंडी ऋतु थी। राधा रानी ने अपने कंधों पर एक काली कमली (काला शाल) ओढ़ रखी थी। उन्होंने वह काली कमली उतारी… और अत्यंत प्रेम से यशोदा मैया को दे दी। ⸻ 💙 और तभी से श्याम सुंदर कहलाए — “काली कमली वाले” जब यशोदा मैया ने वह काली कमली कन्हैया को ओढ़ाई… तो सचमुच उनकी उदासी दूर हो गई। उनके चेहरे पर फिर से वही दिव्य मुस्कान लौट आई। वृंदावन में यह बात फैल गई कि राधा रानी की कमली ने कन्हैया की नज़र उतार दी। कहते हैं— उस दिन के बाद से श्याम सुंदर उस काली कमली को अपने से अलग नहीं करते थे। क्योंकि वह केवल एक कपड़ा नहीं था… वह था राधा का प्रेम, राधा का आशीर्वाद, और राधा का प्रसाद। इसीलिए आज भी भक्त प्रेम से गाते हैं— “काली कमली वाला मेरा यार है, मेरे मन का मोहन सरकार है…” और प्रेम से पुकारते हैं— “हमारे कन्हैया… काली कमली वाले।”

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