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27.8.2026 सृष्टि का काल 4 अरब 32 करोड़ वर्ष का है। और मनुष्य का जीवन केवल 100 वर्ष का है। *"सृष्टि काल के सामने 100 वर्ष तो कितना छोटा काल है।"* और आजकल तो 100 वर्ष भी कहां रहा? अब तो 70 / 80 वर्ष भी बहुत हो जाते हैं, और इतने में ही जीवन पूरा हो जाता है। 70 / 80 वर्ष के इस छोटे से जीवन में पचासों समस्याएं आती रहती हैं। *"जब 70 80 वर्ष के छोटे से जीवन में समय-समय पर पचासों समस्याएं आती हैं, तो एक-एक समस्या का समय तो और भी बहुत कम हुआ। कोई समस्या दो घंटे रहती है, कोई समस्या 5 घंटे। कोई 2-5 दिन रहती है, और कोई दो-चार महीने भी चल जाती है। परंतु कुछ ही समय बाद वह समाप्त हो जाती है।"* इस प्रकार के दृष्टिकोण से यदि आप विचार करें, तो समस्याएं आपको बहुत छोटी लगेंगी। *"इसलिए निराश तो कभी भी न हों। सदा उत्साहपूर्वक बुद्धिमत्ता और पुरुषार्थ से समस्याओं को हल करें।"* यही एक अच्छा दृष्टिकोण है सोचने का। और यही सही दृष्टिकोण है। *"तो इस सही दृष्टिकोण से जीवन को देखें। यदि आप इस दृष्टिकोण से समस्याओं का समाधान ढूंढें, तो कुछ ही समय में आपकी सभी समस्याएं बारी-बारी से दूर हो जाएंगी, और फिर आप हल्के फुल्के होकर सुख से अपना जीवन जी पाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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