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23.2.2026 संसार में ऐसा देखा जाता है, कि *"कोई व्यक्ति 25/30 वर्ष की आयु में ही बहुत बुद्धिमान हो जाता है। और कोई कोई 60/65 वर्ष की आयु में भी विशेष बुद्धिमान नहीं बन पाता। क्या कारण है?"* कारण यह है, कि *"जो व्यक्ति जीवन में आने वाली कठिनाइयों से संघर्ष करता है। पूर्व जन्म के अधिक विद्या बुद्धि के संस्कारों वाला भी होता है। उन संस्कारों के कारण वह कुछ स्वयं परिश्रम करता है। कुछ अन्य विद्वानों बुद्धिमानों से सलाह लेता है। इस प्रकार से पुरुषार्थ करते-करते वह कुछ ही समय में बुद्धिमान बन जाता है। और जीवन में आने वाली कठिनाइयां को पार कर जाता है, उन्हें जीत लेता है।"* *"और जो व्यक्ति पूर्व जन्म के अधिक विद्या बुद्धि के संस्कारों वाला नहीं होता। वर्तमान में भी विशेष पुरुषार्थ नहीं करता। तथा अन्य बुद्धिमानों की सलाह पर भी नहीं चलता। वह व्यक्ति 60/65 वर्ष की आयु में भी बुद्धिमान नहीं बन पाता।"* *"इसलिए व्यक्ति को केवल अपनी बुद्धि से ही सारे निर्णय नहीं करने चाहिएं। क्योंकि उसका ज्ञान अधूरा और अनुभव कम होता है।"* अतः जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए विशेष बुद्धिमान होना आवश्यक है। और *"उसके लिए अन्य विद्वानों बुद्धिमानों की सलाह लेनी चाहिए। उनके मार्गदर्शन से लाभ उठाना चाहिए, और स्वयं भी पूरा पुरुषार्थ करना चाहिए। तब जाकर व्यक्ति विशेष बुद्धिमान बनता है, और सुखी होता है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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