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16.3.2026 जीवन में अनुकूल प्रतिकूल परिस्थितियां तो सबके सामने आती रहती हैं। जब-जब आपके सामने भी प्रतिकूल परिस्थितियां आवें, तो उस समय तीन विकल्प होते हैं। पहला -- *"अपनी क्षमता और अपने साधनों से प्रतिकूल परिस्थितियों को बदलकर अपने अनुकूल बना लीजिए।"* दूसरा -- *"यदि अपने अनुकूल नहीं बना सकते, तो एक सीमा तक उन्हें सहन कर लीजिए, तथा उन्हें अपने अनुकूल बनाने का प्रयत्न जारी रखिए।"* तीसरा -- *"यदि पुरुषार्थ करने पर भी परिस्थितियां आपके अनुकूल नहीं हो पाई, और आपकी सहनशक्ति भी समाप्त हो गई," तब तीसरा विकल्प यह है कि "आप उस स्थान को छोड़ दीजिए और उन व्यक्तियों से दूर चले जाइए।" "यदि आप ऐसा करेंगे, तो आप ठीक प्रकार से जीवन जी सकेंगे। अन्यथा आपके जीवन में अनेक भारी कठिनाइयां उत्पन्न हो जाएंगी। आपका जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। आप डिप्रेशन में भी जा सकते हैं, और कोई उल्टा सीधा कदम भी उठा सकते हैं।"* ऐसा न हो, इसलिए *"तीन में से जो भी विकल्प आपको उचित लगे, उसे अपनाएं, और अपने जीवन को शांत एवं सुरक्षित बनाए रखें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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