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*जय भोलेनाथ जी* 🌙 *शुभ रात्रि जी* 🙏 *आज का रात्रि चिंतन: भोलेनाथ का शांत स्वरूप* रात का समय दिनभर के कर्मों से मुक्त होकर _स्वयं से मिलने_ का समय है। और भोलेनाथ से बेहतर इस यात्रा में साथी कौन होगा? *1. जटाओं में गंगा क्यों?* महादेव की जटाओं में गंगा इसलिए बहती हैं क्योंकि _विचारों का वेग भी गंगा जैसा होना चाहिए_ — पवित्र, अविरल, पर नियंत्रण में। आज रात सोने से पहले मन की गंगा में सारे कलुष बहा दीजिए। जो बात दिनभर भारी लगी, उसे शिव की जटाओं में छोड़ दीजिए। *2. तीसरी आंख का रहस्य* शिव की तीसरी आंख खुलती है तो कामदेव भस्म हो जाते हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह — ये सब दिन में हमें जलाते हैं। रात को आंख बंद करने से पहले अपनी तीसरी आंख यानी _विवेक_ से देखिए: आज क्या व्यर्थ था? क्या छोड़ना है? भोलेनाथ उसे भस्म कर देंगे। *3. भस्म रमैया का संदेश* शिव श्मशान की भस्म लगाते हैं। क्यों? क्योंकि _अंत में सब भस्म ही होना है_। ये वैराग्य नहीं, सत्य है। जब ये याद रहता है तो अहंकार नहीं आता, नींद भी अच्छी आती है। जो मिला है उसका शुक्र, जो नहीं मिला उसका मोह नहीं। *4. नीलकंठ का सबक* संसार का विष पीकर भी महादेव _नीलकंठ_ कहलाए, पर मुस्कुराना नहीं छोड़ा। आज आपको किसी की बात, किसी का व्यवहार, कोई चिंता विष जैसी लगी हो — उसे कंठ तक रखिए, मन तक मत ले जाइए। भोलेनाथ संभाल लेंगे। *रात्रि का मंत्र* बिस्तर पर लेटकर 11 बार मन में कहें: _ॐ नमः शिवाय_ हर श्वास के साथ महसूस करें कि भोलेनाथ के कैलाश की ठंडी हवा आपको छू रही है। चिंता भस्म, मन शांत। *भोलेनाथ का आशीर्वाद* _आज की रात आपकी सारी थकान हर लें भोलेनाथ।_ _सपने में भी उनके डमरू की ध्वनि आपको निर्भय करे।_ _कल सुबह एक नई ऊर्जा, नई शांति के साथ उठें।_ *चंद्रशेखर की कृपा से आपकी रात्रि मंगलमय हो* 🌌 _हर हर महादेव_

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