
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
254 days ago
19.12.2025 *"आज का व्यक्ति बहुत स्वार्थी हो गया है। वह अपने सुख की बात अधिक सोचता है, और दूसरों के सुख की कम।"* परंतु ईश्वर का नियम तो यह है, कि *"यदि आप दूसरे व्यक्ति के लिए सुख चाहेंगे, उसको सुख देंगे, तब तो ईश्वर भी आपको सुख देगा। अन्यथा वह भी आपको सुख नहीं देगा।"* *"यदि लोग इतनी सी बात को समझ जाएं, और अपना सुख चाहने से पहले दूसरों का सुख चाहने लगें। उनके सुख के लिए थोड़ा प्रयत्न करें, तो ईश्वर निश्चित रूप से उन्हें बहुत आनन्द देगा।"* आपके पुत्र पुत्री आदि कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं, जो आपको बहुत अधिक प्रिय हों, जिन्हें आप बहुत प्रेम करते हों। और वे भी आपसे प्रेम करते हों। *"यदि किसी परिस्थिति में वे आपके प्रिय व्यक्ति = पुत्र पुत्री आदि पढ़ाई यात्रा व्यापार या नौकरी आदि के कारण या अन्य भी किसी कारण से वे आपसे दूर हों, आप उनसे मिल नहीं पा रहे हों, तो आप उन्हें मन की गहराई से याद करें। उनके कल्याण की कामना करें। उनके स्वस्थ सुखी और सुरक्षित होने की कामना करें।"* ऐसा करने पर आपको अंदर से बहुत आनन्द मिलेगा। यह आनन्द ईश्वर की ओर से होगा। क्योंकि ईश्वर का नियम है, कि *"जब आप दूसरों का भला चाहते और करते भी हैं, तो ईश्वर भी आपका भला चाहता है, और करता भी है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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