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जय श्री राम! पवनपुत्र हनुमान जी महाराज की जय। अयोध्या धाम की पावन धरा पर स्थित **हनुमानगढ़ी** से १० अप्रैल २०२६ के इस मंगलमयी अवसर पर प्रभु के दर्शन और आरती का भाव अत्यंत ही सौभाग्यशाली है। हनुमानगढ़ी के राजा के दरबार में आज की दिव्य आरती के मुख्य अंश और आध्यात्मिक अनुभव कुछ इस प्रकार हैं: ### **हनुमानगढ़ी की दिव्य आरती दर्शन** आज की आरती में प्रभु का श्रृंगार अत्यंत ही मनमोहक और अलौकिक है। भक्तगण भारी संख्या में 'बजरंग बली की जय' के उद्घोष के साथ मंदिर परिसर में उपस्थित हैं। | **आरती का समय** | **प्रकार** | **विशेषता** | |---|---|---| | प्रातः काल | **मंगला आरती** | प्रभु को जागृत कर उनका प्रथम अभिषेक और श्रृंगार। | | संध्या काल | **संध्या आरती** | धूप-दीप और नैवेद्य के साथ प्रभु की भव्य स्तुति। | | रात्रि काल | **शयन आरती** | दिनभर के दर्शन के पश्चात प्रभु को विश्राम देने की मधुर आरती। | ### **प्रभु का दिव्य स्वरूप** * **श्रृंगार:** आज हनुमान जी महाराज को सिंदूरी लेपन के साथ स्वर्ण और चांदी के आभूषणों से सुसज्जित किया गया है। * **पुष्प वर्षा:** गेंदे और गुलाब के ताजे फूलों से गर्भगृह को महकाया गया है। * **प्रसाद:** प्रभु को शुद्ध घी के बेसन के लड्डुओं का भोग लगाया गया है, जो हनुमानगढ़ी की विशेष पहचान है। ### **हनुमान चालीसा की पावन पंक्तियाँ** आज के दिन इन पंक्तियों का स्मरण करना फलदायी है: > **"संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा।।"** > **"जै जै जै हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं।।"** > ### **भक्तों के लिए संदेश** अयोध्या के राजा, हनुमान जी महाराज, भक्तों के सभी कष्टों को हरने वाले हैं। १० अप्रैल के इस पावन दिन पर, यदि आप अयोध्या में उपस्थित नहीं भी हैं, तो मानसिक रूप से प्रभु के चरणों में अपना शीश नवाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। **मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।** **जय हनुमान!**

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