
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
173 days ago
10.3.2026 भारत की पुरानी परंपरा रही है, कि *"यहां के लोग अपने वृद्ध माता-पिता और दादा-दादी आदि के साथ रहते हैं, और उनकी वृद्धावस्था में उनकी सेवा करते हैं।"* परंतु आजकल विदेशी सभ्यता के प्रभाव से यह भारतीय परंपरा बहुत कम होती जा रही है। *"ये अच्छे लक्षण नहीं हैं।"* क्योंकि *"जब आप छोटे बच्चे थे, तो आपके माता-पिता और दादा-दादी ने आपकी जो सेवा रक्षा और देखभाल की, उसके कारण आज आप इतने समर्थ हुए हैं। यदि आपके माता-पिता और दादा-दादी आपके बचपन में आपकी सेवा रक्षा और पालन पोषण अच्छी प्रकार से न करते, तो आज आप इतनी अच्छी स्थिति में नहीं होते, जिस स्थिति में आज आप हैं। यदि वे अच्छे ढंग से आपकी सेवा पालन पोषण आदि न करते, तो शायद आप आज जीवित भी नहीं होते। इसलिए आपको उनका उपकार बहुत अधिक मानना चाहिए।"* और अब जब वे वृद्धावस्था में आ गए हैं, तो अब उनकी शक्ति कम हो जाने से, आज उन्हें आपकी सेवा और सुरक्षा की आवश्यकता है। *"तो उनका जो ऋण आपके ऊपर है, उसे चुकाने के लिए श्रद्धापूर्वक सम्मानपूर्वक आप उनकी सेवा करें, तभी आपका ऋण उतरेगा, और उनकी भी रक्षा हो जाएगी।"* *"आपके इस उत्तम सेवा कार्य को आपके बच्चे भी देखेंगे और वे भी आपसे सीखेंगे। यदि आप अपने वृद्ध माता-पिता आदि की सेवा करेंगे, तो आपकी वृद्धावस्था में आपके बच्चे भी आपकी सेवा कर देंगे। अन्यथा आपको भी वैसे ही कष्ट भोगने पड़ेंगे, जैसे आपकी सेवा के बिना आज आपके माता-पिता और दादा-दादी आदि कष्ट भोग रहे हैं।"* *"इसलिए आज ही सावधान हो जाएं। अपने बुढ़ापे की चिंता करें। अपने बड़े बुजुर्गों की प्रेमपूर्वक श्रद्धापूर्वक और सम्मान पूर्वक सेवा अवश्य करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (2)

R k jangid phulera Jaipur
Mar 10, 2026
अति सुंदर ऐसी चीज हर घर में हो जाए तो वृद्ध आश्रम बंद हो जाएंगे🙏
