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*हजारों* फूल *चाहिए* एक *माला* बनाने *के* लिए *हजारों* दीपक *चाहिए* एक *आरती* सजाने *के* लिए *हजारों* बूंदें *चाहिए* समुद्र *बनाने* के *लिए* *पर* एक *स्त्री* अकेली *काफी* है *घर* को *स्वर्ग* बनाने *के* लिए। एक घर को केवल ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि एक स्त्री के प्रेम और संस्कारों से ही 'स्वर्ग' का स्वरूप मिलता है। आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस खास मौके पर, समाज की हर उस महिला को नमन है जो अपनी निस्वार्थ सेवा और शक्ति से संसार को बेहतर बना रही हैं। आज के लिए एक विशेष सुविचार > "नारी केवल एक नाम नहीं, वह शक्ति, क्षमा और ममता का अटूट संगम है। जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ खुशियाँ और बरकत खुद-ब-खुद वास करती हैं।" > आपको और आपके परिवार को भी महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ! *HAPPY WOMENS DAY*

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