MyMandirInstall

बैसाखी का त्योहार भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है, लेकिन सिख इतिहास में यह दिन **1699** में हुई एक ऐसी घटना का साक्षी है जिसने पूरे समाज की दिशा बदल दी। यहाँ खालसा पंथ की स्थापना और उसके पावन जन्मस्थान से जुड़ी मुख्य जानकारियाँ दी गई हैं: ## खालसा पंथ की स्थापना (1699) 13 अप्रैल 1699 को, सिखों के दसवें गुरु, **गुरु गोविंद सिंह जी** ने आनंदपुर साहिब में एक विशाल सभा बुलाई। उस दिन उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसने वीरता और समर्पण की एक नई परिभाषा लिखी: * **पाँच प्यारों का चुनाव:** गुरु जी ने अपनी तलवार म्यान से निकाली और सभा के सामने 'एक शीश' (सिर) की माँग की। एक-एक करके पाँच साहसी लोग आगे आए (दया राम, धर्म दास, हिम्मत राय, मोहकम चंद और साहिब चंद)। इन्हें **'पंज प्यारे'** कहा गया। * **अमृत छकना:** गुरु जी ने लोहे के पात्र में जल और चीनी (पताशे) डालकर खंडा (दोधारी तलवार) से उसे हिलाते हुए 'अमृत' तैयार किया। उन्होंने पहले पंज प्यारों को अमृत छकाया और फिर स्वयं उनके हाथों से अमृत ग्रहण किया। * **समानता का संदेश:** इस दिन से पुरुषों के नाम के पीछे **'सिंह'** (शेर) और महिलाओं के नाम के पीछे **'कौर'** (राजकुमारी) लगाने की परंपरा शुरू हुई, जिससे जातिगत भेदभाव पूरी तरह समाप्त हो गया। ## जन्मस्थान: तख्त श्री केसगढ़ साहिब खालसा का जन्मस्थान **आनंदपुर साहिब** (पंजाब) है, जो शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित है। * **पवित्र स्थान:** आनंदपुर साहिब के मुख्य गुरुद्वारे को **तख्त श्री केसगढ़ साहिब** कहा जाता है। यह सिख धर्म के पाँच तख्तों (अधिकार की सीटों) में से एक है। * **ऐतिहासिक महत्व:** यहीं पर वह ऐतिहासिक तंबू लगा था जहाँ गुरु जी ने पंज प्यारों की परीक्षा ली थी। आज भी यहाँ गुरु गोविंद सिंह जी के वे ऐतिहासिक शस्त्र (जैसे खंडा) सुरक्षित रखे गए हैं, जिनका उपयोग खालसा की स्थापना के समय हुआ था। ## खालसा के पाँच ककार (5 K's) गुरु जी ने खालसा सिखों के लिए पाँच अनिवार्य प्रतीक निर्धारित किए, जो उनकी पहचान और अनुशासन का हिस्सा हैं: 1. **केश:** परमात्मा की देन का सम्मान करना। 2. **कंगा:** स्वच्छता और व्यवस्था का प्रतीक। 3. **कड़ा:** गुरु के प्रति अटूट बंधन और संयम। 4. **कछैरा:** उच्च चरित्र और सक्रियता। 5. **कृपाण:** आत्मरक्षा और निर्बलों की रक्षा का संकल्प। बैसाखी का यह पर्व केवल फसल कटाई का उत्सव नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित होने का प्रतीक है। **खालसा मेरो रूप है खास, खालसे महि हौं करौं निवास।** आपको बैसाखी की लख-लख बधाइयाँ!

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!