
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
99 days ago
23.5.2026 संसार में ऐसा देखा जाता है, कि बहुत से लोग अपनी गलतियां तो सुधारते नहीं, केवल दूसरों की गलतियां ही ढूंढते रहते हैं। यह व्यवहार तो ठीक नहीं है। *"क्योंकि गलतियां करने से तो दुख ही बढ़ता है, अपना भी और दूसरों का भी।"* *"अब जो लोग स्वयं अपनी गलतियां ढूंढते नहीं और उन्हें दूर नहीं करते। उनकी तो उन्नति का दरवाजा ही बंद हो गया। क्योंकि वे गलतियां करते रहेंगे, तथा उन गलतियों से वे स्वयं भी दुखी रहेंगे और दूसरों को भी दुख देंगे। इसलिए यह कोई बुद्धिमत्ता की बात नहीं है।"* *"न्याय, सभ्यता और बुद्धिमत्ता की बात यह है, कि व्यक्ति पहले अपनी गलतियां ढूंढे। उन्हें दूर करे। फिर जब उसकी अपनी बहुत सी गलतियां छूट जाएं, तब वह दूसरों की गलतियां ढूंढे और उन्हें दूर करने का प्रयास करे।"* अर्थात उन्हें सुझाव देवे कि *"पहले मैं भी बहुत सी गलतियां करता था, तब मैं बहुत दुखी था। अब मैंने वे गलतियां छोड़ दी और मैं सुखी हो गया। आप भी इसी पद्धति से विचार करें। यदि आपके अंदर भी कोई गलतियां हों, कोई दोष हों, कमियां हों, तो आप भी उन्हें अपने अंदर ढूंढें तथा दूर करें।" "यदि आपकी इच्छा हो तो इस कार्य में मैं भी आपकी सहायता कर सकता हूं।"* *"इस प्रकार से यदि आप अपनी गलतियों को ढूंढेंगे, उन्हें स्वीकार करेंगे, उन्हें दूर करेंगे, तो आपकी भी उन्नति होगी। आप भी सुखी हो जाएंगे। जब आप स्वयं सुखी हो जाएंगे, तब आप भी दूसरों को भविष्य में सुझाव दे सकेंगे। उनकी गलतियां दूर कर सकेंगे, और बहुत सा पुण्य प्राप्त कर सकेंगे।"* ऐसा कहने पर यदि दूसरा व्यक्ति ऐसा कहे, *"कि हां जी। आप मेरा सहयोग करें। मैं अपनी गलतियां दूर करना चाहता हूं। अपनी उन्नति करके सुखी होना चाहता हूं।" "तब आप उसकी गलतियां ढूंढने में अपना समय और शक्ति खर्च करें। तब आपको पुण्य मिलेगा और दूसरे का भी कल्याण होगा।"* *"जो व्यक्ति अपनी गलतियां तो दूर करता नहीं, उसे दूसरों को गलती बताने का अधिकार भी नहीं होता।" "इसलिए पहले अपना कर्तव्य निभाएं तो आपको अधिकार स्वयं ही मिल जाएगा। तब उसका उपयोग करें। ऐसा करने से ही सबका जीवन सुखमय बनेगा।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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