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27 जनवरी: इतिहास के झरोखे से यादों का कारवां आज 27 जनवरी है। कैलेंडर का यह पन्ना जब भी पलटता है, अपने साथ इतिहास की कुछ ऐसी गूँज लेकर आता है जो कभी हमें गर्व से भर देती है, तो कभी मानवता के प्रति संवेदनशील बना देती है। आज का दिन केवल तारीख नहीं, बल्कि उन कहानियों का संगम है जिन्होंने दुनिया और देश की दिशा बदली। 'ऐ मेरे वतन के लोगों': सुरों की वो अमर विदाई आज ही के दिन 1963 में दिल्ली के नेशनल स्टेडियम में एक ऐसी स्वर-लहरी गूँजी थी, जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू समेत पूरे देश की आँखों को नम कर दिया था। सुर कोकिला लता मंगेशकर ने पहली बार कवि प्रदीप द्वारा रचित गीत 'ऐ मेरे वतन के लोगों' गाया था। 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद जब देश का मनोबल टूटा हुआ था, तब इस गीत ने राष्ट्रवाद की एक नई अलख जगाई। कहते हैं कि जब लता जी ने ये पंक्तियाँ गाईं: > "जब घायल हुआ हिमालय, खतरे में पड़ी आजादी, > जब तक थी साँस लड़े वो, फिर अपनी लाश बिछा दी।" > तो वहाँ मौजूद हर शख्स निशब्द था। यह गीत आज भी भारतीय शौर्य का अनौपचारिक राष्ट्रगान माना जाता है। मानवता का काला अध्याय और मुक्ति की सुबह वैश्विक स्तर पर 27 जनवरी एक भावुक याद का दिन है। 1945 में इसी दिन सोवियत सेना ने पोलैंड में स्थित ऑशविट्ज़ (Auschwitz) यातना शिविर को आजाद कराया था। यह वह जगह थी जहाँ मानवता ने अपना सबसे क्रूर चेहरा देखा था। आज इस दिन को पूरी दुनिया में 'अंतर्राष्ट्रीय प्रलय स्मरण दिवस' के रूप में मनाया जाता है, ताकि हम याद रख सकें कि नफरत का अंजाम क्या होता है। अंतरिक्ष की एक दुःखद अग्निपरीक्षा विज्ञान की राह हमेशा आसान नहीं होती। 1967 में आज ही के दिन नासा के Apollo 1 मिशन के दौरान एक भयानक हादसा हुआ था। परीक्षण के दौरान कमांड मॉड्यूल में आग लग गई थी, जिसमें तीन अंतरिक्ष यात्रियों की जान चली गई। इस हादसे ने दुनिया को सिखाया कि सितारों तक पहुँचने का रास्ता कितने संघर्षों और बलिदानों से होकर गुजरता है। आज की कुछ रोचक झलकियाँ * साहित्य और क्रांति: महान क्रांतिकारी मदन लाल ढींगरा और हिंदी के यशस्वी लेखक कमलेश्वर की स्मृतियाँ भी इस दिन से जुड़ी हैं। * टेलीविजन का आविष्कार: 1926 में आज ही के दिन जॉन लोगी बेयर्ड ने पहली बार टेलीविजन का सफल प्रदर्शन किया था। सोचिए, आज हम जिस 'स्क्रीन' के बिना रह नहीं सकते, उसकी पहली झलक आज ही दिखी थी। शब्द-संगम 27 जनवरी हमें याद दिलाती है कि समय का पहिया हमेशा घूमता रहता है। कहीं सुरों की मधुरता है, तो कहीं इतिहास के घाव; कहीं विज्ञान की ऊँचाइयाँ हैं, तो कहीं बलिदान की गाथाएँ। यह दिन हमें सिखाता है कि हम अपने अतीत से सीखें और वर्तमान को और भी अर्थपूर्ण बनाएँ। > "वक्त के पन्ने पलटकर तो देखो, > हर तारीख में एक दास्तां छिपी है।"

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