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माँ पूर्णागिरि धाम, जिन्हें पुण्यागिरि के नाम से भी जाना जाता है, उत्तराखंड के चंपावत जिले में टनकपुर के पास अन्नपूर्णा पर्वत शिखर पर स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 3000 फीट की ऊंचाई पर है और भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। इस पावन धाम के बारे में कुछ मुख्य जानकारियां: धार्मिक महत्व * शक्तिपीठ: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ सती माता की 'नाभि' गिरी थी, इसलिए इसे बेहद पवित्र माना जाता है। यह 108 सिद्ध पीठों में से एक है। * मान्यता: इसे 'झूठे का मंदिर' भी कहा जाता है, जिसके पीछे एक प्राचीन पौराणिक कथा है। माना जाता है कि यहाँ आने वाले भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यात्रा और पहुँच मार्ग * स्थान: यह चंपावत जिले के टनकपुर शहर से लगभग 20-22 किमी की दूरी पर स्थित है। * कैसे पहुँचें: * सड़क मार्ग: टनकपुर से थुल्लीगढ़ तक वाहन (टैक्सी या बस) से जाया जा सकता है। * पैदल मार्ग: थुल्लीगढ़ से मुख्य मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 3 किमी की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है। * नजदीकी रेलवे स्टेशन: टनकपुर रेलवे स्टेशन सबसे पास है, जो देश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। दर्शन का समय और मेला * मंदिर का समय: मंदिर आमतौर पर सुबह 5:00 बजे से रात 8:00 बजे तक खुला रहता है। (समय में मौसम के अनुसार बदलाव संभव है)। * मुख्य मेला: यहाँ हर साल चैत्र नवरात्रि (मार्च-अप्रैल) के दौरान एक विशाल मेला लगता है, जो लगभग 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। * उत्तम समय: यहाँ आने के लिए अक्टूबर से जून का समय सबसे अच्छा माना जाता है। मानसून के दौरान भूस्खलन के खतरे के कारण यात्रा थोड़ी कठिन हो सकती है।

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