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30.9.2026 यदि *"धन संपत्ति और वेदों की उत्तम विद्या" इन दोनों की तुलना की जाए, कि "दोनों में से कौन बड़ा है? तो शायद आप समझ ही गए होंगे, कि धन संपत्ति से विद्या का मूल्य अधिक है।"* परंतु आजकल संसार में लोगों का चिंतन इससे उल्टा ही है। *"लोग धनवान व्यक्ति को बड़ा समझते हैं, और वेदों के विद्वान तथा उत्तम आचरण वाले व्यक्ति को धनवान से छोटा समझते हैं। यह समझ उल्टी है।" "इस उल्टी समझ को उल्टा करके सीधा करें।"* और यह समझें कि *"जिसके पास धन संपत्ति भले ही अधिक हो, परंतु उसके पास यदि वेदों का शुद्ध ज्ञान नहीं है, और उसका आचरण भी वेदानुकूल नहीं है, तो वह छोटा व्यक्ति है।"* और इसके विपरीत, *"जिसके पास वेदों का शुद्ध ज्ञान है, उसका आचरण भी वेदों के अनुकूल है। जो ईश्वर को साक्षी मानकर वेदोक्त उत्तम कर्म करता है, वही व्यक्ति संसार में सबसे बड़ा संपत्तिशाली है। हम सबको उसी का अनुकरण करना चाहिए। वह उस वैदिक ज्ञान और उत्तम आचरण के कारण सुखी है। उसका यह जीवन भी अच्छा है और उसका आगे भविष्य भी बहुत अच्छा है।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक निदेशक दर्शन योग महाविद्यालय रोजड़ गुजरात।"*

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