
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
134 days ago
गिद्धों का अपने पैरों पर पेशाब करना (जिसे वैज्ञानिक भाषा में **Urohidrosis** कहा जाता है) कोई साधारण आदत नहीं है, बल्कि इसके पीछे बहुत ही ठोस वैज्ञानिक और जैविक कारण हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: * **शरीर के तापमान को नियंत्रित करना (Cooling Effect):** गिद्ध अक्सर गर्म इलाकों में रहते हैं। चूंकि उन्हें पसीना नहीं आता, इसलिए वे अपने पैरों पर तरल मल-मूत्र (जो काफी हद तक पानी जैसा होता है) छोड़ते हैं। जब यह तरल उनके पैरों से वाष्पित (evaporate) होता है, तो इससे उनके शरीर का तापमान कम हो जाता है और उन्हें गर्मी से राहत मिलती है। * **बैक्टीरिया से सुरक्षा (Sanitization):** गिद्ध सड़ा-गला मांस (carrion) खाते हैं। जब वे किसी मृत जानवर के शरीर पर खड़े होकर उसे खाते हैं, तो उनके पैरों पर खतरनाक बैक्टीरिया और रोगाणु लग जाते हैं। गिद्ध के पेशाब में **यूरिक एसिड (Uric Acid)** की मात्रा बहुत अधिक होती है, जो एक शक्तिशाली एंटीसेप्टिक की तरह काम करता है। यह एसिड उनके पैरों पर मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया को मार देता है, जिससे वे संक्रमण से बचे रहते हैं। * **पैरों की सुरक्षा:** उनके पेशाब में मौजूद यूरिया और अन्य तत्व उनके पैरों की त्वचा को सख्त होने या फटने से भी बचाते हैं, जो उनके जीवित रहने के लिए जरूरी है। संक्षेप में, यह व्यवहार उन्हें भीषण गर्मी से बचाने और गंदगी में पनपने वाली बीमारियों से सुरक्षित रखने का एक प्राकृतिक तरीका है।
Comments (1)

Pannalal panchal
Apr 18, 2026
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
