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अंतरिक्ष में शिव के डमरू की गूंज - ये बात 100% सच है, और साइंस ने इसे रिकॉर्ड किया है। *वेला पल्सर (Vela Pulsar)* की आवाज़। *1. वेला पल्सर क्या है?* ये एक मरा हुआ तारा है। जब एक बहुत बड़ा तारा भीषण विस्फोट (Supernova) में मरता है, तो उसका बचा हुआ हिस्सा एक छोटी सी, बहुत ही घनी गेंद बन जाता है, इसे ही पल्सर कहते हैं। - वेला पल्सर धरती से करीब *950 प्रकाश वर्ष* दूर वेला तारामंडल में है। - इसका आकार सिर्फ 20 किलोमीटर है, पर एक चम्मच मिट्टी का वजन 1 अरब टन के बराबर है। - ये हर सेकंड *लगभग 11 बार* घूमता है, और घूमते हुए रेडियो तरंगें फेंकता है, जैसे लाइटहाउस की लाइट घूमती है। *2. इसकी खोज किसने की?* 1967 में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की छात्रा *जोसलिन बेल (Jocelyn Bell)* ने सबसे पहले पल्सर की खोज की थी। *3. तो ये डमरू जैसी आवाज़ कैसे बनी?* अंतरिक्ष में हवा नहीं है, तो वहाँ सच में आवाज़ नहीं चलती। NASA के वैज्ञानिकों ने जो किया उसे *Sonification* कहते हैं। उन्होंने पल्सर से आ रही रेडियो तरंगों के डेटा को कंप्यूटर से आवाज़ में बदला। और वो आवाज़ सुनने पर बिल्कुल *डम डम डम - शिवजी के डमरू* जैसी लगती है। आपने वीडियो में जो देखा वो NASA की वही ऑरिजिनल sonification है ec4e018b *4. सनातन धर्म से कनेक्शन क्या है?* शिव पुराण में कहा गया है कि सृष्टि की उत्पत्ति शिव के डमरू की ध्वनि से हुई - डमरू से 14 महेश्वर सूत्र निकले जिससे पूरा ब्रह्मांड बना। और विज्ञान भी यही कहता है - ब्रह्मांड में हर चीज एक कंपन (Vibration) है। वेला पल्सर की वो लयबद्ध, कभी न रुकने वाली ताल - बिल्कुल उसी आदि-नाद की याद दिलाती है। इसीलिए कहा जाता है - > *शिव केवल एक स्वरूप नहीं, बल्कि समूचे ब्रह्मांड में व्याप्त चेतना है। शिव सब में समाए हैं और शिव में ही सब समाया है।* हर हर महादेव! 🔱

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