
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
178 days ago
यह दुनिया का वह कड़वा सच है जिसे अक्सर 'समाज का चक्र' कहा जाता है। आपकी यह बात संघर्ष करने वाले हर व्यक्ति की कहानी बयां करती है। इस सफर के तीन पड़ाव अक्सर ऐसे ही दिखते हैं: * उदासीनता (गरीबी): जब जेब खाली होती है, तो दुनिया अक्सर नजरें फेर लेती है। लोग हाल-चाल पूछना भी जरूरी नहीं समझते। * उपहास (मेहनत): जब आप कुछ नया करने या खुद को बदलने की कोशिश करते हैं, तो लोग 'पागल' या 'बेकार' समझकर हंसते हैं। यह दौर सबसे कठिन होता है क्योंकि यहाँ आपको अकेले ही लड़ना पड़ता है। * ईर्ष्या (कामयाबी): और जैसे ही आप सफल होते हैं, वही लोग जो कल हंस रहे थे, आज आपकी कामयाबी को 'किस्मत' बताकर जलने लगते हैं। पर गौर करने वाली बात यह है: इन तीनों ही स्थितियों में लोग आपके साथ नहीं, बल्कि आपकी स्थिति के साथ होते हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप अपनी मेहनत और ईमानदारी पर भरोसा रखें। अंत में आपकी सफलता ही उन सबकी बोलती बंद करती है।
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