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*मोतियाबिंद क्या है?* इसका सबसे बड़ा भ्रम यही है 👇 लोग क्या सोचते हैं? आँख के ऊपर कोई सफेद चमड़ी / जाला जम गया है जिसे डॉक्टर खुरच कर हटा देंगे। असल सच्चाई क्या है? मोतियाबिंद आँख के ऊपर नहीं, बल्कि पुतली के ठीक पीछे जो आपका कुदरती लेंस है, उसके *अंदर* होता है। 1. हमारे लेंस में Crystallin नाम के प्रोटीन होते हैं जो एकदम सटीक लाइन में सजे होते हैं, ताकि रौशनी आर-पार जाकर पर्दे (Retina) पर फोकस हो सके। 2. मजे की बात - लेंस के बीच वाले सेल्स माँ के पेट में बनने के बाद कभी नए नहीं बनते। 3. उम्र के साथ धूप की UV किरणें और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से ये प्रोटीन टूट कर आपस में गुच्छे बना लेते हैं। 4. बिलकुल वैसे ही जैसे गर्म तवे पर कच्चा पारदर्शी अंडा सफेद हो जाता है, वैसे ही हमारा साफ लेंस पहले पीला, फिर दूध जैसा सफेद धुंधला हो जाता है। रौशनी बिखर जाती है और धुंधला दिखने लगता है। इसका इलाज? आजकल *Phacoemulsification (फेको)* तकनीक है: - आँख में सिर्फ 2mm का छोटा सा कट लगाते हैं - एक अल्ट्रासोनिक प्रोब अंदर जाती है जो ध्वनि तरंगों से उस कठोर सफेद लेंस को तोड़कर तरल बना देती है और वैक्यूम से बाहर खींच लेती है - फिर उसी खाली थैली (Capsule) में एक मुड़ा हुआ नकली लचीला लेंस (IOL - Intra Ocular Lens) डाल देते हैं, जो अंदर जाकर खुल जाता है और रोशनी फिर से साफ हो जाती है। तो मोतियाबिंद कोई बाहर का जाला नहीं, बल्कि सालों तक रोशनी झेलने के बाद हमारे ही लेंस के प्रोटीन का थक कर धुंधला हो जाना है, जिसे आज विज्ञान मिनटों में ठीक कर देता है।

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