MyMandirInstall

25.3.2026 आशाओं पर सबका जीवन टिका है। लोग एक दूसरे से आशाएं रखते हैं। दूसरों के सहयोग से उन की कुछ आशाएं पूरी हो जाती हैं, और कुछ नहीं। जब दूसरों से आशाएं पूरी नहीं हो पातीं, तो धीरे-धीरे उनसे आशाएं कम होने लगती हैं। धीरे धीरे लोगों को अनुभव होने लगता है, कि *"यह व्यक्ति अपना नहीं है। यह पराया है। क्योंकि यह हमारा ध्यान नहीं रखता। यह हमारी मदद नहीं करता।"* *"जो व्यक्ति आशाएं पूरी करता है, हमारा ध्यान रखता है, तो हमें यह अनुभव होने लगता है, कि यह व्यक्ति हमारा है, अपना है।"* इस बात को समझने में कभी-कभी कम समय लगता है, और कभी-कभी अधिक। तो *"इस बात को आप जितना जल्दी समझ लेंगे, कि कौन अपना है और कौन पराया? उतने ही आप अधिक सुखी रहेेंगे। और जितना अधिक समय लगाएंगे, उतना ही आप को दुख अधिक भोगना पड़ेगा।"* *"और कोई कोई व्यक्ति तो ऐसा होगा, जो न पहले आपका था, और न ही आगे आपका हो पाएगा। ऐसे व्यक्तियों को तो बहुत जल्दी पहचान लेना चाहिए।"* *"इस पहचान करने के लिए अपनी बुद्धि को बढ़ाएं। जल्दी से पहचानकर अपने दुखों को कम करें तथा अपना सुख बढ़ाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!