
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
125 days ago
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को **'मोहिनी एकादशी'** कहा जाता है। इस व्रत की सबसे बड़ी महिमा यही है कि यह बड़े से बड़े पापों का नाश कर व्यक्ति को धर्म के मार्ग पर ले आता है। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं युधिष्ठिर को इस व्रत का महत्व बताते हुए वह कथा सुनाई थी, जिसमें एक अत्यंत दुष्ट व्यक्ति का हृदय परिवर्तन हो गया था। ### **धृतबुद्धि की कथा: दुष्ट से धर्मात्मा बनने का सफर** प्राचीन काल में भद्रावती नामक नगरी में **धृतिमान** नाम के राजा राज करते थे। वहीं **धनपाल** नाम का एक वैश्य भी रहता था, जो अत्यंत धर्मात्मा और भगवान विष्णु का भक्त था। उसके पाँच पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटा पुत्र **धृतबुद्धि** अत्यंत दुष्ट और पापी था। * **दुष्टता का पराकाष्ठा:** धृतबुद्धि अपने पिता के धन को जुए, शराब और मांस जैसे बुरे कामों में उड़ाता था। वह देवताओं, ब्राह्मणों और अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता था। * **घर से निष्कासन:** अंत में थक-हारकर उसके पिता और भाइयों ने उसे घर से निकाल दिया। उसके साथियों ने भी धन खत्म होते ही उसका साथ छोड़ दिया। * **संकट और पश्चाताप:** भूख-प्यास से व्याकुल होकर वह चोरी करने लगा। कई बार पकड़े जाने और दंड मिलने के बाद वह जंगल की ओर भाग गया। जंगल में भटकते हुए, अपने कुकर्मों पर विचार करते हुए उसे गहरा पश्चाताप हुआ। ### **कौण्डिन्य ऋषि का मार्गदर्शन** भटकते हुए वह **कौण्डिन्य ऋषि** के आश्रम पहुँचा। उस समय वैशाख मास चल रहा था और ऋषि गंगा स्नान कर लौट रहे थे। धृतबुद्धि ने उनके चरणों में गिरकर प्रार्थना की: > "हे ऋषिवर! मुझ पर कृपा करें और कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे जीवन के पाप नष्ट हो सकें और मुझे मुक्ति का मार्ग मिले।" > ऋषि ने दया भाव से उसे **मोहिनी एकादशी** का व्रत करने का सुझाव दिया। ऋषि के बताए अनुसार धृतबुद्धि ने विधि-विधान से यह व्रत किया। ### **व्रत का प्रभाव** इस एक व्रत के प्रभाव से धृतबुद्धि के सभी पाप भस्म हो गए। उसका मन शुद्ध हो गया और वह मोह-माया के जाल से मुक्त होकर भगवान की भक्ति में लीन हो गया। अंत में वह दिव्य शरीर धारण कर विष्णुलोक को सिधारा। ### **मोहिनी एकादशी का महत्व** * **पापों का नाश:** यह व्रत जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। * **मानसिक शांति:** जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उसे मानसिक शांति और स्पष्ट निर्णय लेने की शक्ति मिलती है। * **मोक्ष की प्राप्ति:** शास्त्रों के अनुसार, मोहिनी एकादशी का व्रत रखने से हजारों गौ-दान के समान पुण्य प्राप्त होता है। **भगवान विष्णु की मोहिनी छवि हमें यह सिखाती है कि संसार की माया से निकलकर सत्य (ईश्वर) की शरण में जाना ही जीवन का अंतिम लक्ष्य है।** 🙏🏼
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