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8.3.2026 जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।कभी व्यक्ति किसी क्षेत्र में विजय प्राप्त करता है, तो कभी किसी क्षेत्र में हार भी जाता है। अनेक बार ऐसा भी होता है कि *"चारों तरफ से समस्याएं एक साथ घेर लेती हैं, और उसकी बुद्धि ठीक से काम नहीं करती, कि इस समय मैं क्या करूं?"* समाज के अधिकांश लोग भी स्वार्थी हैं। ऐसी परिस्थितियों में घिरा हुआ देखकर वे भी कोई विशेष सहायता नहीं करते। *"अपवाद रूप से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो ऐसे संकट काल में ऐसे व्यक्ति की सहायता कर देते हैं। उनका भी सहयोग अवश्य ही लेना चाहिए।"* *"उन मनुष्यों के अतिरिक्त सबसे बड़ी शरण तो ईश्वर की है। जो ईश्वर की शरण लेता है। प्रतिदिन ईश्वर के साथ जुड़कर चलता है। ईश्वर को साक्षी मानकर सब कार्यों का संपादन करता है। पहले तो ऐसा व्यक्ति हारता नहीं।" "और यदि कभी किसी क्षेत्र में हार भी जाए अथवा चारों तरफ से उसे समस्याएं घेर लेवें, तो ऐसी स्थिति में वह घबराता नहीं। समाज के बुद्धिमान धार्मिक सदाचारी तथा उसके हितकारी लोगों की सहायता और ईश्वर की कृपा से वह उन सब समस्याओं को पार कर लेता है। बस, शर्त एक ही है, कि वह धार्मिक ईमानदार और बुद्धिमान होना चाहिए।"* *"यदि ऐसे गुणों वाला कोई व्यक्ति प्रतिदिन ही ईश्वर को साक्षी मानकर सारे कार्य करे, तब तो वह कभी निराश होगा ही नहीं। वह डिप्रेशन में जाएगा ही नहीं। ईश्वर का सहयोग लेने से सब प्रकार से उसकी उन्नति होती रहेगी। वह जीवन में सफलता का अनुभव करेगा।"* *"यदि आप भी ऐसा ही चाहते हों, तो प्रतिदिन ईश्वर के साथ जुड़कर अपने सब कार्यों का संपादन करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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