
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
84 days ago
8.6.2026 आज मनुष्य ने भौतिक क्षेत्र में बहुत उन्नति कर ली। अनेक प्रकार के साधन मशीनें और स्कूटर कार कंप्यूटर मोबाइल फोन और अन्य भी रोबोट आदि न जाने कैसे-कैसे भौतिक साधन बना लिए। इन सब साधनों से खूब व्यापार कर लिया। बहुत सा धन भी कमा लिया। परंतु एक चीज की कमी सबको खटकती है। और वह है *"एक दूसरे पर विश्वास न होना।"* लोगों के पास धन संपत्ति आदि की कमी नहीं है, सम्मान की भी कमी नहीं है। *"फिर भी लोग एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर पा रहे, जो कि सुख शांति प्राप्त करने हेतु अत्यंत आवश्यक है।"* प्रायः हर व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति पर संशय बना रहता है, कि *"पता नहीं यह कैसा व्यक्ति है? न जाने कब मुझे लूट लेगा? कब मेरी हानि कर देगा!"* आदि आदि इस प्रकार का संशय बना रहता है। तो इस संशय को दूर करने तथा दूसरे का विश्वास प्राप्त करने का क्या उपाय है? उसका उपाय यही है, कि *"व्यक्ति दूसरों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करे।"* *"आज लोगों में ईमानदारी देखने को नहीं मिल रही। इसीलिए लोग परेशान हैं, तनाव और चिंता में हैं। दूसरों पर संशय करते हैं। तथा विश्वास की कमी के कारण ही वे शांति सुख से जी नहीं पा रहे। रात को अच्छी गहरी नींद नहीं आती। क्योंकि दूसरों पर विश्वास नहीं है।"* यदि आप भी दूसरों का विश्वास प्राप्त करना चाहते हों, तो दूसरों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करें। *"यही उसका रहस्य है। यह काम थोड़ा कठिन अवश्य है, परन्तु बहुत कठिन या असंभव नहीं है।"* *"यदि आप ईश्वर को साक्षी मानकर सारे काम करें, और ईश्वर की न्याय व्यवस्था को समझ लें, तो आप सबके साथ ईमानदारी से व्यवहार कर सकेंगे। और तब दूसरे लोग भी आप पर विश्वास करेंगे।"* ईश्वर की न्याय व्यवस्था यह है, कि *"यदि आप दूसरों के साथ ईमानदारी से व्यवहार करेंगे, तो लोग आप पर विश्वास करेंगे। उस स्थिति में ईश्वर आपको सुख देगा। आपको शांति मिलेगी, आनन्द मिलेगा और आपका जीवन सफल हो जाएगा।" "और यदि आप दूसरों को धोखा देंगे, उनके साथ झूठ छल कपट अन्याय आदि व्यवहार करेंगे, तो ईश्वर जीते जी आप को तनाव युक्त रखेगा। यह तो आपको इसी जन्म में दंड मिलेगा। और अगले जन्मों में पशु पक्षी कीड़ा मकोड़ा वृक्ष वनस्पति आदि योनियों में दुख देकर आपको दंड देगा। वह किसी को भी नहीं छोड़ता। वह पक्का न्यायकारी है।"* *"अतः ईमानदारी से व्यवहार करें। दूसरों का विश्वास प्राप्त करें और सदा सुखी रहें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (1)

R k jangid phulera Jaipur
Jun 8, 2026
जय श्री कृष्णा🙏
