MyMandirInstall

*🪦बहुत कम लोग जानते हैं कि — महादेव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा केवल एक आभूषण नहीं है।❣️* ✨ पुराणों के अनुसार चंद्रदेव का विवाह दक्ष प्रजापति की २७ पुत्रियों से हुआ था, लेकिन वे सबसे अधिक प्रेम केवल रोहिणी से करते थे। इससे क्रोधित होकर दक्ष ने चंद्रदेव को क्षीण होने का शाप दे दिया। शाप से पीड़ित चंद्रदेव ने महादेव की कठोर तपस्या की। 🙏 🌙महादेव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए और उन्हें अपने मस्तक पर स्थान दिया। इसी कारण चंद्रमा आज भी घटता और बढ़ता है, लेकिन कभी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं होता। `•लेकिन इस कथा का एक और गहरा अर्थ भी है...` चंद्रमा समय और मन का प्रतीक माना जाता है। और महादेव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा यह संदेश देता है कि — `समय बदल सकता है, परिस्थितियाँ बदल सकती हैं, लेकिन काल भी महाकाल के अधीन है। 🕉️` `जिसके सिर पर महाकाल का हाथ हो,` `उसे समय से भय नहीं,` `समय पर विश्वास होता है।` 🙏🏻🔱🚩 *🌙 हरहर_महादेव🌙* *♿#जय_श्री_चंद्रशेखर_महादेव♿* 🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱🔱

Post media

Comments (1)

सविता

सविता

Jun 8, 2026

om namah shivay 🙏🌹