MyMandirInstall

13.9.2026 हम देखते हैं, कि *"कुछ लोग स्वार्थी किस्म के होते हैं. वे दूसरों से अपना स्वार्थ सिद्ध कर लेते हैं, फिर उन्हें भूल जाते हैं। सभ्यता पूर्वक उन्हें धन्यवाद भी नहीं देते। उनका आभार भी नहीं मानते। ऐसे लोग 'असभ्य' कहलाते हैं। उनका जीवन उत्तम नहीं माना जाता।"* *"अपने जीवन को उत्तम बनाने के लिए आपका व्यवहार विनम्र सरल तथा आभार पूर्ण होना चाहिए। तभी आप प्रसन्न सुखी और सफल जीवन वाले माने जाएंगे। और तभी लोग आपके जीवन को उत्तम मानेंगे, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!