
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
114 days ago
9.5.2026 जीवन में दो प्रकार की परीक्षाएं होती हैं। एक तो पढ़ाई लिखाई की, जो स्कूल कॉलेज गुरुकुल आदि में होती है। और दूसरी जीवन की परीक्षा, जो 24 घंटे और 365 दिन चलती रहती है। *"स्कूली परीक्षा के परीक्षक मनुष्य होते हैं। और जीवन की परीक्षा का परीक्षक ईश्वर होता है।" "यदि आप दोनों क्षेत्रों में सफल होना चाहते हैं, तो अपने स्कूल कॉलेज गुरुकुल आदि की पढ़ाई भी अच्छी प्रकार से करें, और ठीक प्रकार से परीक्षा देवें। जिससे आप उत्तम अंकों से उत्तीर्ण हो सकें।इससे आपका वर्तमान जीवन का भविष्य अच्छा बनेगा।"* *"और जीवन की परीक्षा में भी सब काम अच्छे-अच्छे ही करें। जितने अच्छे काम करेंगे उतने ही अधिक अंक ईश्वर आपको देगा। जीवन की परीक्षा में पास होने पर आपका यह जन्म भी अच्छा अर्थात सुखमय होगा और अगला जन्म भी।"* *"स्कूल की परीक्षा में पास होने के लिए कम से कम 35% अंक चाहिएं। और जीवन की परीक्षा में पास होने के लिए कम से कम 50% अंक चाहिएं।" "अर्थात 35% अंक प्राप्त करके आप धक्का मार स्थिति में पास होंगे और केवल अगली कक्षा में बिठा दिए जाएंगे। यह कोई अच्छी स्थिति नहीं है, घटिया स्थिति है।"* *"इसी प्रकार से मनुष्य जीवन की परीक्षा में यदि 50% अच्छे कर्म किए, तो वैसे ही धक्का मार पास किए जाएंगे। इससे इस जन्म में सामान्य सुख मिलेगा और अगला जन्म भी सामान्य अर्थात मनुष्य योनि में चतुर्थ श्रेणी के परिवार में मिलेगा।"* *"जैसे स्कूल की परीक्षा में 80/90% अंक लाएं, तो यह अच्छी स्थिति है। ऐसे ही कोई मनुष्य अपने जीवन में 80/90% अच्छे कर्म करे, तो यह उसकी जीवन परीक्षा में अच्छी स्थिति मानी जाएगी। इससे उसका यह जन्म तो सुखमय होगा ही, और अगला जन्म भी बहुत उत्तम परिवार में किसी विद्वान बुद्धिमान धनवान ईमानदार देशभक्त ईश्वरभक्त परिवार में होगा।"* *"अब आप परीक्षा देने में स्वतंत्र हैं। मैदान खुला है। जितने चाहें, उतने अंक प्राप्त करें। मेरी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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