
SHREE SHARMA
353 days ago
भक्ति हीन गुण सब सुख कैसे, लवण बिना बहु व्यंजन जैसे। भक्ति हीन सुख कवने काजा, अस बिचारि बोलेऊं खगराजा॥ अर्थ : भक्ति के बिना गुण और सब सुख ऐसे फीके हैं, जैसे नमक के बिना विभिन्न प्रकार के व्यंजन। भजन विहीन सुख किस काम का। यह विचार कर पक्षीराज कागभुशुण्डि जी बोले- (यदि आप मुझ पर प्रसन्न हो तो हे शरणागतों के हितकारी, कृपा के सागर और सुख के धाम कृपा करके मुझे अपनी भक्ति प्रदान कीजिए🙏

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