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जय श्री कृष्णा! शुभ रात्रि। **आज का रात्रि चिंतन** दिनभर की दौड़भाग, अनगिनत विचार और जिम्मेदारियों के बाद रात का यह शांत पहर केवल सोने के लिए नहीं, बल्कि मन को हल्का करने के लिए होता है। * **स्वीकार्यता:** जो आज पूरा हो सका, उसके प्रति कृतज्ञ रहें। जो अधूरा रह गया, उसे कल के भरोसे छोड़ दें। हर दिन की अपनी सीमाएं होती हैं। * **विश्राम मन का भी:** शरीर को बिस्तर मिल जाता है, पर मन अक्सर पुरानी बातों और कल की चिंताओं में उलझा रहता है। मन को समझाइए कि वर्तमान क्षण केवल शांति और विश्राम के लिए है। * **समर्पण:** जब हम सब कुछ अपने नियंत्रण में रखने की कोशिश छोड़ देते हैं और परिणाम ईश्वर पर छोड़ते हैं, तो भीतर एक गहरी निश्चिंतता जन्म लेती है। दिनभर के तनाव को यहीं विदा कीजिए और एक शांत चित्त के साथ निद्रा की गोद में जाइए। कान्हा जी की कृपा से आपकी रात अत्यंत सुखद, शांत और मंगलमय हो।

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