
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
190 days ago
22.2.2026 लोग कहते हैं कि "बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना पाप है, बुरा बोलना पाप है, और शरीर से बुरे काम करना भी पाप है।" जी हां, लोग ठीक कहते हैं। *"बुरा देखना बुरा सुनना और शरीर से बुरे काम करना, यह सब पाप है।"* परंतु वेद आदि शास्त्र कहते हैं कि *"पाप केवल इतना ही नहीं है। बल्कि इन सब का मूल कारण है बुरा सोचना। जैसे बुरा देखना पाप है, बुरा सुनना बुरा बोलना बुरे काम करना भी पाप है। ऐसे ही इन सब का मूल कारण "बुरा सोचना" भी पाप है।"* *"जो व्यक्ति जैसा सोचता है, वह वैसा ही देखता सुनता बोलता और वैसे ही काम करता है।"* इसका अर्थ हुआ कि *"सब पापों का मूल कारण "बुरा सोचना" ही है।"* यदि आप बुरे कामों या पापों से बचना चाहते हों, तो इसका उपाय यही है, कि *"अपने चिंतन को ठीक करें। अपने सोचने को ठीक करें।बुरा न सोचें, बल्कि अच्छा सोचें। अपने लिए भी और दूसरों के लिए भी सबके लिए अच्छा सोचें।"* "यदि आप इस प्रकार से अपने चिंतन को ठीक करके अच्छा देखेंगे अच्छा सुनेंगे अच्छा बोलेंगे और शरीर से भी अच्छे काम करेंगे। तो इन सब अच्छे कर्मों को करके आप बहुत सा पुण्य कमाएंगे।"* *"और यदि आप पुण्य कर्मों का आचरण करेंगे, तो निश्चित रूप से ईश्वर आपको सुख देगा। आपका यह जन्म भी सुखदायक होगा और अगला भी।"* *"अतः अच्छा सोचें, अच्छा बोलें। अच्छा देखें अच्छा सुनें और शरीर से भी अच्छे काम ही करें।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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