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हमारे शरीर में नाभि (Umbilicus) का होना हमारे जन्म से पहले की जीवन यात्रा का एक महत्वपूर्ण निशान है। इसके होने के मुख्य वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण इस प्रकार हैं: 1. जीवन की जीवनरेखा (Life Support System) जब बच्चा माँ के गर्भ में होता है, तो वह न तो मुँह से खाना खा सकता है और न ही फेफड़ों से सांस ले सकता है। उस समय गर्भनाल (Umbilical Cord) माँ के प्लेसेंटा से जुड़कर बच्चे की नाभि के जरिए शरीर में प्रवेश करती है। इसी नली के माध्यम से बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन मिलता है। 2. अपशिष्ट पदार्थों का निकास केवल पोषण लेना ही नहीं, बल्कि बच्चे के शरीर में बनने वाले कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य खराब पदार्थों (Waste products) को वापस माँ के शरीर तक पहुँचाने का काम भी इसी नाभि मार्ग से जुड़ी नसों द्वारा होता है। 3. जन्म के बाद का अवशेष जन्म के तुरंत बाद, जब बच्चा खुद सांस लेना शुरू कर देता है, तो इस गर्भनाल की जरूरत खत्म हो जाती है और इसे काट दिया जाता है। कटे हुए हिस्से का जो निशान बाकी रह जाता है, उसे ही हम नाभि कहते हैं। यह एक तरह का 'स्कार' (Scar) या घाव का निशान है जो पूरी उम्र हमारे साथ रहता है। क्या आप जानते हैं? * हड्डियों का केंद्र: शरीर के विज्ञान में नाभि को शरीर का केंद्र बिंदु माना जाता है। * विविधता: हर इंसान की नाभि का आकार अलग होता है, यहाँ तक कि जुड़वा बच्चों की नाभि भी एक जैसी नहीं होती। * प्रकृति का इंजीनियरिंग: कुछ स्तनधारी जीवों में भी नाभि होती है, लेकिन इंसानों की तरह वह इतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती।

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