
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
192 days ago
भगवान इंसान के हिर्दय मे वास करते है यह एक बहुत ही सुंदर और गहरी बात है। भारत के लगभग सभी संतों, ऋषियों और कवियों ने इस सत्य को अलग-अलग ढंग से दोहराया है। चाहे कबीरदास जी का दोहा हो— "कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माहि"—या उपनिषदों का ज्ञान, हर जगह यही संकेत मिलता है कि जिसे हम मंदिरों और मस्जिदों में ढूंढ रहे हैं, वह हमारे भीतर ही बैठा है। इस विचार के कुछ मुख्य पहलू: * आत्मा और परमात्मा का मिलन: अध्यात्म के अनुसार, हमारी आत्मा परमात्मा का ही एक अंश है। जैसे समुद्र की एक बूंद में भी समुद्र के ही गुण होते हैं, वैसे ही हमारे हृदय में ईश्वर का वास माना गया है। * पवित्रता का महत्व: अगर भगवान हृदय में रहते हैं, तो उस "घर" को साफ रखना भी हमारी जिम्मेदारी है। यहाँ सफाई का अर्थ है— ईर्ष्या, द्वेष और क्रोध को त्याग कर प्रेम और करुणा को अपनाना। * सेवा ही पूजा है: यदि हर इंसान के हृदय में ईश्वर है, तो किसी दूसरे की मदद करना या किसी को सम्मान देना सीधे ईश्वर की सेवा करने जैसा है। > "मोको कहाँ ढूँढे रे बंदे, मैं तो तेरे पास में।" — यह पंक्ति हमें याद दिलाती है कि शांति और ईश्वर की खोज बाहर नहीं, बल्कि अंतर्मुखी (Inward) होकर ही पूरी हो सकती है। >
Comments (4)

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 19, 2026
_*🍀सुझाव, मीठे एवं नरम शब्दों में ही अच्छा लगता है, कड़वे एवं जोर देकर कहे शब्दों का मतलब गलती को ठीक करना नहीं बल्कि व्यक्ति को गलत सिद्ध करना होता है ॥*_ 🌹 शुभप्रभात जी आप का दिन मंगलमय हो जी 🌹

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
Feb 19, 2026
जय श्री कृष्णा जी

R k jangid phulera Jaipur
Feb 19, 2026
जय श्री कृष्णा🙏

Rama Devi Sahu
Feb 19, 2026
*शब्दों में धार नहीं बल्कि* *आधार होना चाहिए.... !* *क्योंकि.....,* *जिन शब्दों में धार होती है वो* *मन को काटते है...l* *और .....* *जिन शब्दों का आधार होता* *वो मन को जीत लेते है..!* *सुप्रभात* *आपका दिन शुभ एवं मंगलमय हो।*🙏😋
