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हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, भगवान सूर्य देव का परिवार काफी विस्तृत है। उन्हें सृष्टि के पालन और ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना जाता है। उनके परिवार की संरचना कुछ इस प्रकार है: 1. माता-पिता * पिता: महर्षि कश्यप (ब्रह्मा जी के मानस पुत्र)। * माता: अदिति (देवताओं की माता)। इसी कारण सूर्य देव को 'आदित्य' भी कहा जाता है। 2. पत्नियाँ सूर्य देव की मुख्य रूप से चार पत्नियाँ मानी जाती हैं, जिनमें संज्ञा और छाया का वर्णन सबसे प्रमुख है: * संज्ञा: विश्वकर्मा की पुत्री। वे सूर्य का तेज सहन नहीं कर पाती थीं। * छाया: संज्ञा की ही छाया (प्रतिरूप), जिन्हें संज्ञा ने अपने स्थान पर छोड़ा था। * उषा और प्रत्युषा: इन्हें भी सूर्य की पत्नियों या उनकी शक्तियों के रूप में देखा जाता है जो भोर (सुबह) का प्रतीक हैं। 3. संतानें सूर्य देव की संतानें अत्यंत प्रभावशाली हैं और ब्रह्मांड के विभिन्न कार्यों का संचालन करती हैं: | माता | संतान | विवरण | |---|---|---| | संज्ञा | यमराज | मृत्यु के देवता और धर्मराज। | | | यमुना | पवित्र नदी (यमराज की बहन)। | | | वैवस्त मनु | वर्तमान मन्वंतर के अधिपति और मानवता के पूर्वज। | | छाया | शनि देव | कर्मफल दाता और न्याय के देवता। | | | ताप्ती | एक पवित्र नदी। | | | विष्टि (भद्रा) | ज्योतिष में 'भद्रा' काल इन्हीं से संबंधित है। | | संज्ञा (अश्विनी रूप) | अश्विनी कुमार | देवताओं के वैद्य (नासत्य और दस्त्र)। | > रोचक तथ्य: कर्ण (महाभारत के पात्र) और सुग्रीव (रामायण के पात्र) को भी सूर्य देव का अंशावतार या पुत्र माना जाता है। > 4. सूर्य का रथ और सारथी * सारथी: अरुण (गरुड़ जी के बड़े भाई)। वे शरीर के निचले हिस्से से रहित हैं और सूर्य के रथ को दिशा देते हैं। * रथ के घोड़े: सूर्य के रथ में 7 घोड़े होते हैं, जो सप्ताह के सात दिनों और प्रकाश के सात रंगों (इंद्रधनुष) का प्रतीक हैं।

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