
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
15 days ago
15.8.2026 वैदिक शास्त्रों में लिखा है, कि *"संसार में पूरा सुखी कोई भी व्यक्ति नहीं है।" "अब यदि कोई व्यक्ति सांसारिक पदार्थों = भोजन वस्त्र मकान कार आदि आदि साधनों से सुख लेता है, तो उसको उन वस्तुओं में राग आसक्ति या अटैचमेंट हो जाती है। और जब किन्हीं वस्तुओं या व्यक्तियों से वह दुखी होता है, तो उनके प्रति उस व्यक्ति के मन में द्वेष उत्पन्न होता है। यह राग और द्वेष दोनों ही दुखदायक हैं।"* *"सुख देने वाली वस्तु जब नहीं मिलती, तब दुख होता है। तो यह समझना चाहिए कि यहां राग दुख दे रहा है।" "दुख देने वाली वस्तु जब सामने आ जाती है, तब दुख होता है। तो यह समझना चाहिए कि यहां द्वेष दुख दे रहा है।" इसलिए राग और द्वेष दोनों से बचना चाहिए। अर्थात "जब सुख देने वाली वस्तु सामने आए, तो उसका सुख नहीं लेना है। और जब दुख देने वाली वस्तु सामने आए, तो उससे दुखी नहीं होना है । उससे अपना बचाव अवश्य करना है।"* *"यदि आप इस तरह से जीवन जिएंगे, तो आप राग द्वेष से बचकर जीवन जी सकते हैं। और तब आपके जीवन में शांति प्रसन्नता आनन्द आदि आदि होंगे, अन्यथा नहीं।"* *"भोजन वस्त्र मकान आदि भौतिक वस्तुओं का उपयोग सुख भोगने के लिए न करें। केवल जीवन रक्षा के लिए करें। तो आपके जीवन में राग द्वेष वाली समस्याएं नहीं आएंगी और आप आनन्द से जिएंगे।" "तब आपका चिंतन यह रहेगा कि यदि वस्तु मिल गई, तो ठीक है। और यदि नहीं मिली, तो कोई बात नहीं। फिर कभी प्राप्त कर लेंगे।"* आज स्वतंत्रता दिवस है। स्वतंत्रता का यह अर्थ भी है, कि *"आप अपने मन इंद्रियों के गुलाम न हों, बल्कि उनके राजा हों। आप अपनी इच्छा से अपने मन इंद्रियों का प्रयोग कर सकें। तो इस प्रकार के चिंतन और व्यवहार से आप स्वतंत्रता पूर्वक जी सकेंगे। आज स्वतंत्रता दिवस इस रूप में भी मनाएं कि "हम अपने मन इंद्रियों के गुलाम नहीं बनेंगे, बल्कि इनसे स्वतंत्र होकर इनके राजा बनेंगे।" "स्वतंत्रता दिवस की आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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