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8.2.2026 प्रत्येक व्यक्ति क्या चाहता है, जीवन में सफलता और आनन्द मिले। यदि आप भी ऐसा ही चाहते हों, तो इस का सीधा सरल उपाय इस प्रकार से है, कि *"आप अपना जो भी लक्ष्य बनाते हैं, उसकी प्राप्ति के लिए अपना काम पूरी ईमानदारी से करें। सबसे पहली वस्तु है ईमानदारी से काम करना। झूठ छल कपट बिल्कुल नहीं करना।"* दूसरी बात है बुद्धिमत्ता। बहुत से लोगों का निर्णय बुद्धिमत्तापूर्ण होता है। और बहुत से लोगों का निर्णय मूर्खतापूर्ण होता है। *"जो लोग सत्यग्राही होते हैं, हठी या अड़ियल नहीं होते, उनके निर्णय बुद्धिमत्ता पूर्ण होते हैं। वे अपने जीवन में सफल होते हैं।" "और जो हठी या अड़ियल होते हैं, अपनी ग़लत बात पर भी अड़े रहते हैं, सत्य को स्वीकार नहीं करते, उनके निर्णय मूर्खतापूर्ण होते हैं। ऐसे लोग अपने जीवन में असफल हो जाते हैं।"* *"सफलता प्राप्त करने के लिए तीसरा कारण है, पूर्ण पुरुषार्थ करना। कामचोरी नहीं करना, काम से बचने का प्रयास नहीं करना। जमकर पुरुषार्थ करना।"* *"और चौथी बात है ईश्वर विश्वास। ऊपर बताए तीन साधनों से आपको सफलता तो मिल जाएगी, परंतु आनन्द की प्राप्ति के लिए एक चौथा काम यह भी करना होगा कि आप ईश्वर पर भी विश्वास रखें, आस्तिक बनें। तब आपकी सफलता के साथ-साथ आपका आनन्द और भी बढ़ेगा। जो लोग नास्तिक होते हैं, उन्हें ऊपर बताए तीन काम करने से जीवन में सफलता तो मिल जाती है, पर उसमें आनन्द की कुछ कमी बनी रहती है। वह कमी पूरी होती है ईश्वर विश्वास से। ईश्वर विश्वास करने का एक यह लाभ भी है, कि व्यक्ति में नम्रता सभ्यता आदि गुण भी बढ़ते हैं। और हठ मूर्खता तथा अभिमान आदि दोष भी छूट जाते हैं। इसलिए पूरी सफलता तभी माननी चाहिए, जब आपके जीवन में ऊपर बताई चारों बातें हों।"* *"इस प्रकार से जो व्यक्ति अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए ये चार साधन अपना लेता है, ईमानदारी, बुद्धिमत्ता, पूर्ण परिश्रम और ईश्वर विश्वास। बस, उसका जीवन सफल हो जाता है। उसके जीवन में आनन्द ही आनन्द हो जाता है।"* *"यदि आप भी अपने जीवन में सफल और आनन्दित होना चाहते हों, तो ऊपर बताए इन चार साधनों को अपनाएं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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