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जय श्री कृष्णा! जय रणछोड़! गुजरात के खेड़ा जिले में स्थित **डाकोर** का रणछोड़राय मंदिर भक्तों की आस्था का एक बहुत बड़ा केंद्र है। इस मंदिर के साथ भक्त **बोडाणा** की अनन्य भक्ति की एक बहुत ही सुंदर और भावुक कथा जुड़ी हुई है। यहाँ डाकोर के रणछोड़राय मंदिर की संक्षिप्त कथा दी गई है: ### भक्त बोडाणा की अटूट श्रद्धा प्राचीन काल में डाकोर में **विजयानंद बोडाणा** नाम के एक महान कृष्ण भक्त रहते थे। उनकी श्रद्धा इतनी गहरी थी कि वे हर साल डाकोर से द्वारका (जो सैकड़ों किलोमीटर दूर है) पैदल यात्रा करके भगवान के दर्शन करने जाते थे। वे अपने हाथ में एक छोटा सा **तुलसी का पौधा** लेकर चलते थे और द्वारका पहुंचकर उसे भगवान के चरणों में अर्पित करते थे। ### भगवान का भक्त के साथ चलना जब बोडाणा काफी वृद्ध हो गए, तब एक बार भगवान द्वारकाधीश ने उन्हें सपने में दर्शन दिए और कहा, "अब तुम्हें इतनी दूर आने की आवश्यकता नहीं है। मैं खुद तुम्हारे साथ डाकोर चलूँगा।" भगवान ने बोडाणा से कहा कि अगली बार जब वह द्वारका आएं, तो एक बैलगाड़ी साथ लाएं। बोडाणा एक पुरानी बैलगाड़ी लेकर द्वारका पहुंचे। आधी रात को भगवान द्वारकाधीश स्वयं मंदिर से बाहर आए और बोडाणा की गाड़ी में बैठ गए। कथा के अनुसार, भगवान ने स्वयं बैलगाड़ी चलाई और पलक झपकते ही वे डाकोर के पास पहुंच गए। ### गोमती नदी में मूर्ति का छिपाना अगली सुबह जब द्वारका के पुजारियों को पता चला कि भगवान की मूर्ति गायब है, तो वे बोडाणा का पीछा करते हुए डाकोर तक आ पहुंचे। डर के मारे बोडाणा ने मूर्ति को डाकोर के **गोमती तालाब** में छिपा दिया। पुजारी जब तालाब की छानबीन करने लगे, तो उन्होंने पानी में भाले से वार किया। कहा जाता है कि उस वार से भगवान की मूर्ति से रक्त निकलने लगा और आज भी गोमती तालाब का पानी कहीं-कहीं लाल दिखाई देता है। ### सोने के बराबर वजन अंत में, द्वारका के पुजारियों और बोडाणा के बीच एक समझौता हुआ। पुजारियों ने कहा कि वे मूर्ति तभी छोड़ेंगे जब उसके वजन के बराबर सोना उन्हें दिया जाएगा। बोडाणा बहुत गरीब थे, उनके पास केवल उनकी पत्नी की एक **सोने की नथ (नाक की बाली)** थी। जब तराजू के एक पलड़े में मूर्ति को रखा गया और दूसरे में बोडाणा की पत्नी की छोटी सी नथ रखी गई, तो भगवान की कृपा से वह नथ मूर्ति के वजन से भी भारी हो गई। पुजारी समझ गए कि भगवान स्वयं अपने भक्त के पास रहना चाहते हैं। ### मंदिर की कुछ खास बातें: * **रणछोड़ नाम का अर्थ:** भगवान कृष्ण ने जब जरासंध के साथ युद्ध के बीच में ही मैदान छोड़ दिया था, तब से उन्हें 'रणछोड़' (रण छोड़ने वाला) कहा जाने लगा। * **डाकोर की महिमा:** जो मूर्ति आज डाकोर में है, माना जाता है कि वही द्वारका की मूल मूर्ति है। * **विशेष दिन:** हर पूर्णिमा को डाकोर में भारी मेला लगता है और हजारों भक्त दर्शन के लिए उमड़ते हैं। **जय रणछोड़राय!**

Comments (1)

Riya Riya  💖💖

Riya Riya 💖💖

Apr 30, 2026

🌹🙏राधे राधे जी 🌹🌹 जय श्री कृष्ण जी 🌿🦚 शुभ दुपुर वंदन भैया जी 🙏🌹