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26.7.2026 अनेक लोग बातें तो बहुत अच्छी-अच्छी करते हैं। देखने सुनने में उनके विचार बहुत अच्छे होते हैं। *"परंतु जब उनके जीवन आचरण को देखते हैं, तो उनके कर्म वैसे नहीं होते, जैसे उनके विचार वे प्रस्तुत करते हैं।"* यह ठीक है, कि उनके विचार भले ही अच्छे हैं। परन्तु विशेष ध्यान देने की बात यह है कि *"केवल अच्छे विचारों से अच्छा फल नहीं मिलता।" "यदि आपके विचार अच्छे हैं, तो उसके अनुकूल आपको कर्म भी अच्छे करने चाहिएं।"* *"जब व्यक्ति अच्छे कर्म करता है, तभी वह अच्छा फल प्राप्त करने का अधिकारी बनता है। तब समाज भी उसे अच्छा फल देता है और ईश्वर भी।"* *"अतः केवल अच्छे विचार ही न करें, बल्कि उनके अनुसार अच्छे कर्म भी करें। अच्छे कर्म ही व्यक्ति की असली संपत्ति है। अच्छे कर्म करने पर ही अच्छा फल मिलेगा, अन्यथा नहीं।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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