
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
286 days ago
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐छत का साया💐💐* शहर के कोने में एक पुराना घर था, जिसमें रामलाल और उनकी पत्नी सीता रहते थे। बरसों की मेहनत से उन्होंने वह घर बनाया था — ईंट-ईंट जोड़कर, जैसे किसी ने सपनों का महल गढ़ा हो। तीन बेटे थे — सब पढ़े-लिखे, नौकरी वाले, और अब अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त। एक दिन बड़े बेटे ने कहा, “पिताजी, अब यह घर पुराना हो गया है। इसे बेच देते हैं, नया फ्लैट लेंगे — शहर के बीचों-बीच।” रामलाल मुस्कुराए — “बेटा, यह घर पुराना सही, पर इसमें हमारी यादें बसती हैं।” पर दुनिया की रफ्तार भावनाओं से तेज़ थी। कुछ ही महीनों में घर बिक गया। नए फ्लैट में जगह तो थी, पर मन कहीं नहीं ठहरता था। धीरे-धीरे तीनों बेटों की बातें बदलने लगीं — “माँ-पिताजी को अब आराम चाहिए, गाँव भेज दो। वहाँ हवा भी अच्छी है, खर्च भी कम होगा।” एक शाम, बारिश हो रही थी। बेटों ने सामान बाँधकर कहा — “गाँव में सब इंतज़ाम कर दिया है, वहाँ आराम से रहिएगा।” सीता की आँखों से आँसू झरते रहे, पर रामलाल बस एक वाक्य बोले — “जिस घर को हमने अपने बच्चों के लिए बनाया था, आज वही घर हमारे बिना है।” गाँव में बस एक टूटी झोपड़ी मिली, और कुछ पुराने कपड़े। कोई पूछने वाला नहीं, कोई देखने वाला नहीं। धीरे-धीरे सीता बीमार पड़ गईं। आख़िरी साँसों में उन्होंने रामलाल से कहा — “शायद हमारे बच्चों को अभी ‘घर’ का मतलब नहीं समझ आया।” महीनों बाद, शहर में खबर आई — *“गाँव में एक बुज़ुर्ग दंपती ठंड से मर गए।”* तीनों बेटे कुछ देर मौन रहे, फिर अपने-अपने फोन में खो गए। और उस रात, जब वे अपने फ्लैट की छत के नीचे सो रहे थे — *उनके सपनों में वही पुराना घर आया — जिसमें माँ रसोई में और पिता आँगन में बैठे मुस्कुरा रहे थे…* *शिक्षा:* माता-पिता को घर से निकालना, अपने भाग्य से सुख को निकालने जैसा है। *घर दीवारों से नहीं, माँ-बाप के आशीर्वाद से बनता है।* 🙏🚩🙏

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