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बैंकाक (Bangkok) के वाट त्रिमित्र (Wat Traimit) मंदिर में स्थित यह मूर्ति न केवल कला का अद्भुत नमूना है, बल्कि इसका इतिहास भी किसी फिल्म की कहानी जैसा रोमांचक है। इसे 'गोल्डन बुद्ध' (Phra Phuttha Maha Suwanna Patimakon) कहा जाता है और यह दुनिया की सबसे बड़ी ठोस सोने (Solid Gold) की मूर्ति है। मूर्ति की विशेषताएँ: * वजन: लगभग 5,500 किलोग्राम (5.5 टन)। * ऊंचाई: लगभग 3 मीटर (9.8 फीट)। * शुद्धता: इसमें लगा सोना लगभग 18 कैरेट से लेकर 24 कैरेट तक शुद्ध है (सिर के हिस्से में सोने की शुद्धता सबसे अधिक है)। * कीमत: इसकी धातु का मूल्य ही करोड़ों डॉलर में है, लेकिन ऐतिहासिक महत्व के कारण यह अनमोल है। छिपा हुआ रहस्य और इतिहास: * निर्माण (13वीं-14वीं शताब्दी): माना जाता है कि यह मूर्ति सुखोथाई राजवंश (Sukhothai Dynasty) के दौरान बनाई गई थी। इसकी शैली उस समय की विशिष्ट कला को दर्शाती है। * पहचान छिपाने का कारण (18वीं शताब्दी): जब 1767 में बर्मी (Burmese) सेना ने थाईलैंड (तब सियाम) पर हमला किया, तो इस कीमती मूर्ति को लूट से बचाने के लिए बौद्ध भिक्षुओं ने चालाकी दिखाई। उन्होंने पूरी मूर्ति पर प्लास्टर (Stucco) और रंगीन कांच की एक मोटी परत चढ़ा दी ताकि यह मिट्टी या पत्थर की एक साधारण मूर्ति लगे। * सैकड़ों साल की गुमनामी: समय बीतने के साथ लोग भूल गए कि इसके भीतर सोना है। यह मूर्ति सालों तक बैंकॉक के एक सामान्य मंदिर (Wat Phraya Krai) में खुले शेड के नीचे पड़ी रही। चमत्कारिक खोज (1955): इस मूर्ति का असली रूप 1955 में दुनिया के सामने आया: * जब इस भारी मूर्ति को 'वाट त्रिमित्र' मंदिर में स्थानांतरित किया जा रहा था, तब क्रेन की रस्सी टूट गई और मूर्ति जमीन पर गिर गई। * गिरने की वजह से मूर्ति के बाहरी प्लास्टर में दरार आ गई। जब भिक्षुओं ने ध्यान से देखा, तो अंदर से सोने की चमक दिखाई दी। * धीरे-धीरे पूरे प्लास्टर को हटाया गया और 5,500 किलो की यह दिव्य सोने की मूर्ति प्रकट हुई। आज की स्थिति: आज यह मूर्ति बैंकॉक के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक है। इसके लिए एक भव्य चार मंजिला इमारत बनाई गई है, जिसके ऊपरी हिस्से में यह विराजमान है।

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