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21.2.2026 झूठ और सच सदा से चलते आए हैं। आज भी चल रहे हैं और भविष्य में भी चलेंगे। न कभी झूठ समाप्त होगा, और न कभी सच। संसार में देखा यही जाता है, कि *"झूठ बहुत तेजी से चलता है। सच धीमे चलता है। परंतु लंबे समय के बाद भी झूठ रास्ते में खो जाता है, वह लक्ष्य पर नहीं पहुंचता।" "सत्य भले ही धीरे चलता है, लेकिन अंतिम लक्ष्य तक पहुंचता है।" इसीलिए वेद आदि शास्त्रों में कहा है, कि "सत्य की ही विजय होती है।"* *"अतः सत्य मार्ग पर चलें, झूठ पर नहीं। क्योंकि झूठ आपको अंतिम लक्ष्य तक अर्थात सुख तक नहीं पहुंचा पाएगा।" "हम सब का अंतिम लक्ष्य है सुख प्राप्त करना।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

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