
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
199 days ago
🛕꧁ जय द्वारकाधीश꧂🛕 "शुंभ और निशुंभ असुर : दो शक्तिशाली दैत्य" "शुंभ और निशुंभ" असुर हिंदू पौराणिक कथाओं में दो बहुत शक्तिशाली दैत्य भाई थे। इनकी मुख्य कथा मार्कण्डेय पुराण के अंतर्गत आने वाली देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती) में विस्तार से वर्णित है, खासकर अध्याय 5 से 10 तक। यह नवरात्रि में पढ़ी-जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण कथाओं में से एक है। शुंभ और निशुंभ कौन थे? ये दोनों दैत्य (असुर) भाई थे, जो अत्यंत बलशाली और घमंडी थे। इन्होंने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था कि कोई पुरुष (मनुष्य, देवता या अन्य पुरुष प्राणी) इन्हें मार नहीं सकता। इस वरदान के बल पर इन्होंने देवताओं को युद्ध में हराया, इंद्र का सिंहासन छीन लिया और तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी, पाताल) पर अपना अधिकार जमा लिया। देवताओं के सभी कार्य (सूर्य, चंद्र, अग्नि, वायु आदि के कार्य) भी ये स्वयं करने लगे थे। इनके प्रमुख सेनापति थे: धूम्रलोचन, चंड, मुंड, रक्तबीज आदि। इनकी कहानी का सार (देवी महात्म्य के अनुसार),:- देवताओं की हार :- शुंभ-निशुंभ ने देवताओं को स्वर्ग से भगा दिया। देवता भटकने लगे और हिमालय में जाकर आदिशक्ति (दुर्गा/चंडिका) की स्तुति करने लगे। देवी का प्राकट्य :- माता पार्वती के शरीर से कौशिकी देवी (एक तेजस्वी रूप) प्रकट हुईं। (कुछ कथाओं में इसे पार्वती से अलग रूप माना जाता है।) देवी बहुत सुंदर और शक्तिशाली थीं। चंड-मुंड का वध :- शुंभ-निशुंभ ने देवी को देखकर उनसे विवाह का प्रस्ताव भेजा। देवी ने इनकार कर दिया। तब उन्होंने पहले धूम्रलोचन को भेजा, फिर चंड-मुंड को। देवी ने महाकाली रूप धारण करके चंड-मुंड का वध किया, इसलिए उन्हें चामुंडा भी कहा जाता है। रक्तबीज का वध :- रक्तबीज नामक असुर का वध करते समय उसकी रक्त की बूंदों से और राक्षस उत्पन्न हो रहे थे। तब देवी ने काली रूप में उसका संहार किया। निशुंभ का वध :- अंत में निशुंभ ने देवी से युद्ध किया। देवी ने उसे भयंकर युद्ध में मार डाला। शुंभ का अंतिम युद्ध और वध :- निशुंभ की मृत्यु से क्रोधित होकर शुंभ स्वयं लड़ा। उसने देवी को ताने मारे कि वो अकेले नहीं लड़ सकती। तब देवी ने सभी मातृकाओं (शक्तियों) को अपने में समाहित कर लिया और अकेले ही शुंभ का वध कर दिया। इस प्रकार देवी ने देवताओं को स्वर्ग वापस लौटाया और धर्म की स्थापना की। प्रतीकात्मक अर्थ शुंभ — "अहंकार" (मैं) का प्रतीक माना जाता है। निशुंभ — "ममता" या "मेरा" (माइन) का प्रतीक। इनका वध = अहंकार और ममता का नाश करके ही आत्मा की शुद्धि और ईश्वर प्राप्ति संभव है। यह कथा नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती के पाठ के रूप में बहुत महत्वपूर्ण है और माँ दुर्गा की महिमा को दर्शाती है। *🔱शिव.शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱* 🔱शिव.शिव.शिव.शिव.li 🔱 *🔱शिव.शिव.शिव.li 🔱*
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