MyMandirInstall
Profile

SHREE SHARMA

12 hours ago

।। हनुमान जी की अजेयता का रहस्य ।। हनुमान जी साहस, शौर्य और बल के देवता माने जाते हैं। कई लोग उनकी भक्ति उनके इन्हीं गुणों को पाने के लिए करते हैं। आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज ने अपने कई प्रवचनों में भगवान हनुमान जी की महिमा का वर्णन बड़े भावपूर्ण ढंग से किया है। अपने एक प्रवचन में उन्होंने बताया कि हनुमान जी को हराना असंभव था। उन्होंने इसका कारण भी बताया। उन्होंने इस बारे मे बताया है कि- हनुमान जी अहंकारशून्य थे- प्रेमानंद जी कहते हैं कि हनुमान जी के अंदर अहंकार का लेशमात्र भी नहीं था। वे परम भक्त थे और सदा राम नाम में लीन रहते थे। उनके कहने का अर्थ था कि जिसे अपने अस्तित्व का अभिमान ही नहीं है, उसे पराजित करना असंभव है। राम नाम की अपार शक्ति- हनुमान जी रामनाम के जीवंत उदाहरण हैं। वे जो कुछ भी करते थे, राम के नाम और आदेश से करते थे। प्रेमानंद जी कहते हैं कि "जो राम नाम के बल पर लंका जला सकता है, उसे कौन पराजित कर सकता है?" उनके इस वचन से यही सन्देश सामने आता है कि आज भी राम नाम की राम नाम के साथ जिसने खुद को एक कर लिया हो, उसे कोई शक्ति नहीं हरा सकती। बुद्धि, बल और भक्ति का समन्वय- हनुमान जी के पास अद्भुत बल, तीव्र बुद्धि और अपार भक्ति का संगम था। प्रेमानंद जी समझाते हैं कि केवल बलवान होना काफी नहीं, बुद्धि और भक्ति के बिना वह बल विनाशकारी बन सकता है। हनुमान जी में ये तीनों एक साथ मौजूद थे। इसलिए उन्हें कोई पराजित नहीं कर पाया। आत्म-समर्पण की पराकाष्ठा- हनुमान जी ने अपना जीवन, शरीर, मन, बुद्धि और कर्म, सब भगवान श्रीराम को समर्पित कर दिए थे। प्रेमानंद महाराज कहते हैं, "जो आत्म-समर्पण में स्थित है, उसे संसार की कोई भी माया या शक्ति जीत नहीं सकती"। अविनाशी तेज और दिव्यता- हनुमान जी का शरीर दिव्य और अजर-अमर माना जाता है। वो काल, ग्रह, यम, भूत-प्रेत आदि सभी प्रकार की बाधाओं से परे हैं। प्रेमानंद जी कहते हैं कि "जिसका तेज स्वयं अग्नि भी सह न सके, वह कैसे हार सकता है?" प्रेमानंद महाराज के अनुसार, हनुमान जी को हराना असंभव है क्योंकि वे भक्ति, बुद्धि और बल तीनों के साक्षात स्वरूप हैं। वे निष्काम, निर्भय और नि:स्वार्थ हैं और जब व्यक्ति में ये तीन गुण पूर्ण रूप से विकसित हो जाएं, तब वह अजेय बन जाता है। ।। जय जय जय हनुमान गुसाईं ।।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!