
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
124 days ago
*🌹जन्मदिन (बर्थडे) तिथि के अनुसार मनाएं या कि तारीख के, क्या है सही?🌹* 💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *⭕यदि किसी का जन्म मकर संक्रांति के दिन हुआ है तो उसे अपना जन्मदिन मकर संक्रांति के दिन ही मनाना चाहिए, क्योंकि मकर संक्रांति का त्योहार तब मनाया जाता है जबकि सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार यह घटना कभी 14 जनवरी को तो कभी 15 जनवरी को घटती है। 1600 में 10 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई गई थी। राजा हर्षवर्द्धन के समय में 24 दिसंबर को मकर संक्रांति मनाई गई थी। मुगल बादशाह अकबर के काल में 10 जनवरी को और वीर छत्रपति सम्राट शिवाजी महाराज के शासनकाल में 11 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई गई थी। एक समय ऐसा भी आएगा जबकि मकर संक्रांति फरवरी में भी मनाई जाएगी। ज्योतिष मान्यता के अनुसार सूर्य की गति प्रतिवर्ष 20 सेकंड बढ़ रही है। इस मान से देखा जाएगा तो करीब 1,000 साल पहले 31 दिसंबर को मकर संक्रांति मनाई गई थी और 5,000 वर्ष के बाद संभवत: मकर संक्रांति फरवरी की किसी तारीख को मनाई जाए। इसलिए तारीख से ज्यादा सही सूर्य और चंद्र की गति होती है। अवैज्ञानिक कैलेंडर की तारीखें सूर्य या चंद्र की गति के अनुसार नहीं चलती है।* *⚜️तिथि का आधार क्या?* *卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐* उपरोक्त सूर्य की गति की बात थी लेकिन तिथि का आधार चंद्र की गति होती है। आपका जन्म हुआ उस समय को सही तौर पर सिर्फ तिथि से ही जाना जा सकता है। आपका जन्म यदि चतुर्थी को हुआ है तो यही आपके जन्म की सही तिथि है जो किसी भी काल में कभी भी बदलने वाली नहीं है। जैसे कि चैत्र माह की नवमी को रामजी का जन्म हुआ था और पूर्णिमा के दिन हनुमानजी का जन्म हुआ था। हर साल चैत्र नवमी और पूर्णिमा की तारीख अलग अलग होती है। तिथि का ही बिगड़ा हुआ रूप है तारीख या डेट। पश्चिम के लोगों ने अपने मनमाने कैलेंडर बनाकर उसे दुनिया पर थोप दिया जो अभी तक प्रचलन में है। आपका जन्म मार्च माह की किसी भी तारीख को हुआ हो और यदि उसी तारीख के दिन आप अपना जन्मदिन मनाते हैं तो यह गलत है आपको भारतीय माह को लेकर उसकी तिथि को लेना चाहिए। आमतौर पर अंग्रेजी तारीखें 24 घंटे में बदलती है जबकि तिथि उन्नीस घंटे से लेकर चौबीस घंटे तक की होती है। इसका मतलब यह कि कोई तिथि 19 घंटे की होगी तो कोई तिथि 24 घंटे की भी हो सकती है। अब यदि कोई तिथि 19 घंटे की होगी तो इसका मतलब है कि मध्यांतर में ही या मध्य रात्रि में ही तिथि बदल जाएगी। आपने देखा होगा चांद को दिन में भी निकलते हुए। दरअसल यह तिथि ग्रह, नक्षत्र, सूर्य, चंद्र आदि को ध्यान में रखकर निर्मित की गई है। भारतीय पंचांग के अनुसार सूर्योदय से दिन बदलते हैं। जिन्हें सावन दिन कहते हैं, मतलब सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक। जहां तक तिथि का प्रश्न है तो वह सूर्य और चंद्रमा के अंतर से तय की जाती है लेकिन उसकी गणना भी सूर्योदय से ही की जाती है। उसी तिथि को मुख्य माना जाता है जो उदय काल में हो। प्रतिपदा से लेकर पूर्णिमा तक शुक्ल पक्ष में 15 तिथियां होती है, लेकिन क्योंकि सौर दिन से चंद्र दिन छोटा होता है इसलिए कई बार एक दिन में दो या तीन तिथियां भी पड़ सकती हैं। इसमें तिथियों की तीन स्थितियां बनती हैं। जिस तिथि में केवल एक बार सूर्योदय होता है उसे सुधि तिथि कहते हैं, जिसमें सूर्योदय होता ही नहीं यानी वह सूर्योदय के बाद शुरू होकर अगले सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाती है उसे छह तिथि कहते हैं, इसमें एक दिन में तीन तिथियां हो जाती है और तीसरी स्थिति वो जिसमें दो सूर्योदय हो जाए उसे तिथि वृद्धि कहते हैं। हिन्दू पंचांग के महीने नियमित होते हैं और चंद्रमा की गति के अनुसार 29.5 दिन का एक चंद्रमास होता है। हिन्दू सौर-चंद्र-नक्षत्र पंचांग के अनुसार माह के 30 दिन को चन्द्र कला के आधार पर 15-15 दिन के 2 पक्षों में बांटा गया है- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष। शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन को पूर्णिमा कहते हैं और कृष्ण पक्ष के अंतिम दिन को अमावस्या। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा माह की 15वीं और शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि है जिस दिन चन्द्रमा आकाश में पूर्ण रूप से दिखाई देता है। पंचांग के अनुसार अमावस्या माह की 30वीं और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है जिस दिन चन्द्रमा आकाश में दिखाई नहीं देता यदि आप अपने जन्मदिन को खगोलीय और वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार मनाना चाहते हैं, तो तिथि के अनुसार जन्मदिन मनाना बेहतर है। आप अपनी जन्म तिथि के अनुसार पूजा, दान और अन्य धार्मिक कर्म कर सकते हैं, जो आपको और आपके परिवार को आशीर्वाद देंगे। *🚩#हरिऊँ🚩* 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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