
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
206 days ago
*🌳🦚आज की कहानी🦚🌳* *💐💐कृपा की छाया💐💐* गंगा किनारे बसे एक छोटे से गाँव में माधव नाम का युवक रहता था। उसका मन भला था, पर आदतें बिगड़ी हुई थीं। क्रोध, आलस्य और कभी-कभी ईर्ष्या—ये सब उसके स्वभाव में घर कर चुके थे। गाँव के लोग उसे अक्सर ताने देते, “इससे तो कुछ होगा नहीं… इसमें तो अवगुण ही अवगुण हैं।” माधव का मन इन बातों से टूट-सा गया था। एक दिन निराश होकर वह गाँव के पुराने हनुमान मंदिर में जा पहुँचा। मंदिर शांत था, दीपक की लौ हल्के-हल्के काँप रही थी। दीवार पर लिखी एक चौपाई उसकी आँखों में ठहर गई— “जदपि नाथ बहु अवगुन मोरें। सेवक प्रभुहि परै जनि भोरें॥” माधव की आँखों से आँसू बह निकले। वह बुदबुदाया, “हे प्रभु! मुझमें सचमुच बहुत अवगुण हैं… पर क्या दास होने के नाते आप मुझे ठुकरा देंगे?” वह रोज़ मंदिर आने लगा। कोई बड़ा व्रत नहीं, कोई कठिन तप नहीं—बस सच्चे मन से एक ही बात कहता, “नाथ! मैं आपका हूँ, जैसा भी हूँ।” कुछ दिनों बाद गाँव में बाढ़ आ गई। लोग घबरा गए। मंदिर के पास रहने वाला माधव बिना सोचे-समझे मदद में जुट गया। किसी को कंधा दिया, किसी का सामान निकाला, किसी बच्चे को गोद में उठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुँचा दिया। उस पल उसे न अपने अवगुण याद थे, न लोगों के ताने—बस भीतर से कोई शक्ति उसे चला रही थी। रात को थका-हारा माधव मंदिर की सीढ़ियों पर बैठ गया। उसी चौपाई की अगली पंक्तियाँ उसके मन में गूँज उठीं— “नाथ जीव तव मायाँ मोहा। सो निस्तरइ तुम्हारेहिं छोहा॥” उसे समझ आ गया— यह भटकाव, यह कमजोरी, यह माया में उलझन… सब मानवीय है। पर उद्धार प्रयास से नहीं, अहंकार से नहीं—केवल प्रभु की कृपा से होता है। अगली सुबह गाँव वालों का व्यवहार बदला हुआ था। वे माधव को सम्मान से देखने लगे। पर माधव के भीतर एक और बड़ा परिवर्तन हो चुका था— अब वह स्वयं से लड़ नहीं रहा था, बल्कि प्रभु की शरण में शांत था। वह मुस्कराकर हनुमान जी की मूर्ति के सामने बोला, “नाथ! अवगुण मेरे हैं, पर भरोसा अब सिर्फ आप पर है।” और उसी क्षण उसे लगा— जैसे कृपा की एक अदृश्य छाया उसके जीवन पर पड़ गई हो। यह कहानी सिखाती है कि— मनुष्य अवगुणों से भरा हो सकता है, पर यदि वह स्वयं को प्रभु का दास मानकर शरण में रख दे, तो कृपा ही उसका मार्ग बदल देती है। 🙏 बोलो सियावर रामचन्द्र की जय 🙏 श्री राम भक्त हनुमान की जय 🚩 *
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