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*🌿 संदेह इंसान को अंदर से कमजोर क्यों कर देता है?* *🌸 || श्रीमद्भगवद्गीता || 🌸* > 📘 अध्याय 4, श्लोक 40 _अज्ञश्चाश्रद्दधानश्च संशयात्मा विनश्यति।_ _नायं लोकोऽस्ति न परो न सुखं संशयात्मनः॥_ 📝 *सरल अर्थ:* जिस व्यक्ति में ज्ञान और श्रद्धा का अभाव हो और जो हर बात में संदेह करता रहे, वह न इस संसार में सुख पाता है, न आगे शांति। 🌸 *व्याख्या:* हर बात पर संदेह करना बुद्धिमानी नहीं होता। कई बार हमारा सबसे बड़ा विरोधी हमारा अपना doubt बन जाता है। *“क्या मैं कर पाऊँगा?” “अगर असफल हो गया तो?”* ऐसे सवाल हमें शुरुआत करने से पहले ही रोक देते हैं। इसका अर्थ अंधविश्वास नहीं, बल्कि विवेक के साथ विश्वास रखना है। जहाँ उचित ज्ञान हो, वहाँ अनावश्यक संदेह छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। क्योंकि लगातार doubt में रहने वाला व्यक्ति अवसर भी खो देता है और शांति भी। > 🕊️ “सही ज्ञान के बाद भी यदि मन संदेह में फँसा रहे, तो रास्ता सामने होते हुए भी कदम आगे नहीं बढ़ते।” 🌸 *।। जय श्री कृष्ण ।।* 🌸

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Comments (4)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 9, 2026

राधे राधे जी 🙏 जय श्री कृष्णा जी 🙏

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Sep 9, 2026

जय श्री कृष्णा जी 🙏 शुभ संध्या जी 🙏

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Sep 9, 2026

🙏‼️ Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna ‼️🙏

R k jangid 

phulera Jaipur

R k jangid phulera Jaipur

Sep 9, 2026

जय श्री कृष्णा शुभ प्रभात 🌹🙏