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*ग्वालियर का अनोखा शनि मंदिर - जहां भक्त शनिदेव से गले मिलते हैं* 🕉️ ग्वालियर के शनिश्चरा मंदिर* की है। ये मंदिर भारत के बाकी शनि मंदिरों से बिल्कुल अलग है। वजह 2 हैं: *1. गले मिलने वाली इकलौती शनि प्रतिमा* पूरे भारत में शनिदेव की पूजा दूर से होती है। तेल चढ़ाओ, सरसों चढ़ाओ, पर मूर्ति को छूना मना है। *पर ग्वालियर में भक्त शनिदेव से गले लगकर रोते हैं, दुख बांटते हैं।* *मान्यता:* शनिदेव यहां "दंडाधिकारी" नहीं "दुखहर्ता" के रूप में हैं। गले मिलने से वे भक्त का सारा दर्द अपने ऊपर ले लेते हैं। शनिवार को यहां लाइन लगती है - लोग बारी-बारी से शनिदेव को गले लगाकर मन हल्का करते हैं। *2. हनुमान जी ने लंका से फेंका था शनिदेव को* *पौराणिक कथा:* रावण ने नवग्रहों को बंदी बना रखा था। शनिदेव को उल्टा लटकाकर रखा था। जब हनुमान जी लंका जलाने गए, तो उन्होंने शनिदेव को आजाद कराया। शनिदेव इतने कमजोर थे कि चल नहीं पा रहे थे। तब हनुमान जी ने शनिदेव को लंका से उठाकर *ग्वालियर के पास मुरैना के एंती गांव में फेंका*। जहां वे गिरे, वहां धरती धंस गई और पाताल से शनिदेव की स्वयंभू मूर्ति प्रकट हुई। तभी से यहां *शनिश्चरा मंदिर* है। "शनिश्चरा" = शनि + चरा = जहां शनि देव चले, गिरे। *इस मंदिर की 4 खास बातें:* बात डिटेल **स्थान** ग्वालियर से 30 km, मुरैना के एंती गांव में। चंबल के बीहड़ों के पास **मूर्ति** स्वयंभू, जमीन से निकली। काले पत्थर की। त्रेता युग की मानी जाती है **परिक्रमा** यहां उल्टी परिक्रमा होती है। क्योंकि शनिदेव लंका में उल्टे लटके थे **शनि पर्वत** मान्यता है कि शनिदेव के गिरने से यहां छोटा सा टीला बन गया था *ध्यान देने वाली बात:* शास्त्रों में शनिदेव को छूने की मनाही है। पर *ये मंदिर अपवाद है*। यहां के पुजारी कहते हैं कि हनुमान जी ने शनिदेव को वचन दिया था - "जो भक्त तुम्हें गले लगाएगा, उसके कष्ट मैं खुद हर लूंगा"। क्योंकि हनुमान जी शनिदेव के गुरु हैं। *सावधानी:* बाकी किसी शनि मंदिर में मूर्ति को न छुएं। सिर्फ ग्वालियर शनिश्चरा में ये परंपरा है। *जय शनिदेव* 🙏 *जय बजरंगबली* 🚩 आप कभी ग्वालियर शनिश्चरा मंदिर गए हो? शनि साढ़ेसाती वाले लोगों के लिए ये जगह बहुत खास मानी जाती है।

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