
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
241 days ago
*अमृत कथा* जब भगवान ने खुद ली धन्नाजी की परीक्षा ------- एक बार ठाकुर जी ने खुद ही धन्ना जी की परीक्षा लेनी चाही. , धन्ना जी के गाँव में अकाल पद गया था और फिर भी धन्ना जी पूरे गाँव और साधु संतों को खाना खिला रहे थे और गरीबों में अनाज बाँट रहे थे. लेकिन धीरे धीरे उनका भी भी भण्डार समाप्त होने लगा., उस वक़्त भी धन्ना जी ने इस बात का निर्णय लिया कि जब तक वो सक्षम हैं तब तक उनसे जो हो सकेगा वो करेंगे. उनकी सेवा से प्रसन्ना होकर ठाकुर जी खुद एक संत के रूप में उनके यहाँ आए और एक बीज दिया औ बोले कि इस बीज को जाकर खेत में लगा आओ और उससे जो भी मिलेगा उसे गाँव वालों में बाँट देना. उन्होंने ऐसा ही किया लेकिन गावीं वाले उन्हें पागल कह रहे थे कि इस सूखे में आखिर कौन सी फसल होगी. मगर फसल जब हुई तो लोगों के अस्चर्या का ठिकाना न रहा. कह्तों में फसल लहरा रही थी. एक दिन ऐसा आया जब धन्नाजी खेतों में लगी फसल पक गयी, धन्ना सेठ के खेत में बड़े-बड़े तुम्बा के फल दिख रहे थे. धन्नाजी से सोचा अब दान करने को तो कुछ है नहीं, अब इन तुंबा से कमंडल बनाकर संतो को दिया करेंगे. धन्नाजी खेतों में लगे सभी तुंबा के फल तोड़कर घर ले आये. घर आकर जैसे ही उन्होंने एक तुंबा को कमंडल बनाने के लिए काटा उन्होंने देखा यह तुंबा हीरे मोती, जवाहरात और कीमती रत्नो से भरा हुआ था. तुंबा को कीमती रत्नो से भरा देखकर वे आश्चर्यचकित रह गए. उनके पास तो तुंबा की पूरी फसल थी. उन्होंने देखा सभी तूम्बों में ऐसे ही कीमती रत्न भरे हुए थे. इस चमत्कार को देखने के बाद धन्ना जी को उन संत की याद आयी जिन्होंने उन्हें तुंबा के बीज दिए थे. अब धन्नाजी उस धन से लोगो की सेवा करने लगे, वे फिर से दोनों हाथो से लोगों की मदद करने लगे. उस समय वह अकाल कई वर्षो तक चला, उस समय धन्ना जी ने अपने घर में और आसपास के कई गांवों में लंगर शुरू करवा दिया. आसपास के सैंकड़ों गाँवो के लाखों लोग वर्षों तक धन्नाजी के लंगर में तीनों समय भोजन किया करते थे. धन्ना सेठ ने अपने जीवनकाल में कई मंदिर, बावड़ियां, तालाब और धर्मशालाएं भी बनवाई और हर तरह से साधु-संतो और जरूरतमंद लोगों की मदद की. लोग धन्नाजी को धन्ना सेठ कहकर बुलाने लगे. धन्नाजी जैसा धनी आज तक कोई नहीं हुआ, वे धन और मन दोनों के धनी थे, आज भी उनके ही नाम पर धनी लोगों को धन्ना सेठ की उपमा दी जाती है ---:: ॐ :: ---

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