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*अकेलेपन को बनाए साधना* उनकी पढ़ाई के लिए, आपने अपने सपनों को टाल दिया, उनके भविष्य के लिए, आज को कुर्बान कर दिया। दिन उनके थे,, रातें उनकी चिंता की थीं और वर्षों बीत गए “कल सब ठीक हो जाएगा” कहते- कहते। और फिर एक दिन वह कल आ ही जाता है —जब बच्चा कहता है, “माँ, मुझे बाहर पढ़ने जाना है…”“पापा, मुझे जॉब के लिए शहर छोड़ना होगा…” आप मुस्कुरा देते हैं। हौसला देते हैं। पीठ थपथपाते हैं।और भीतर…एक पूरा आँगन सूना हो जाता है। कमरे वैसे ही रहते हैं, दीवारें वैसी ही, पर आवाज़ें चली जाती हैं। हँसी विदेश चली जाती है। बहसें जॉब इंटरव्यू में बदल जाती हैं। और तब जन्म लेता है वो शून्य — जिसे कोई दवा नहीं भरती, कोई पैसा नहीं भरता, कोई टीवी, कोई फोन, कोई त्योहार नहीं भर पाता। जब बच्चे चले जाते हैं, तो लोग कहते हैं —“अब आराम करो।” “अब घूमो-फिरो।” “अब अपने लिए जियो।” पर सच यह है —मन खाली हो चुका होता है, और खाली मन आराम से नहीं भरता, वह उद्देश्य से भरता है। यह खालीपन डिप्रेशन क्यों बनता है..? क्योंकि वर्षों तक आपकी पहचान सिर्फ यही रही—मैं किसी का पिता हूँ। मैं किसी की माँ हूँ। आपने खुद को इंसान से पहले अभिभावक बना लिया। और जब भूमिका चली जाती है, तो सवाल उठता है —“अब मैं कौन हूँ?” यही सवाल अगर मार्गदर्शन न पाए, तो वह उदासी बन जाता है, अकेलापन बन जाता है, और धीरे-धीरे डिप्रेशन बन जाता है। जब श्रीराम वन गए —तब माता कौशल्या रोई होंगी। वह भी सूनी हुई होंगी। पर उन्होंने जीवन को विराम नहीं दिया। उन्होंने अपना दुःख समाज के लिए शक्ति में बदला। त्याग को बोझ नहीं बनाया, त्याग को तपस्या बना दिया। *खालीपन को तपस्या कैसे बनाया जाए..?* 1. जो दिया था, उससे आगे दो। बच्चों को आपने संस्कार दिए—अब वही संस्कार समाज को दीजिए—काउंसलिंग, सेवा, मार्गदर्शन, संस्कार- शालाएँ। 2. अपने शरीर को फिर गुरु बनाइए। योग, प्राणायाम, व्रत, अनुशासन —अब आपके शरीर का भी हक है आप पर। 3. जिनको कभी समय नहीं दे पाए — उनको समय दीजिए । माता-पिता, जीवनसाथी, मित्र, समाज और सबसे ज्यादा अपने आप को —अब आपका समय फिर आपका है। 4. अपने भीतर की आग को फिर याद कीजिए कभी आपके भी सपने थे —अब फिर से उन सपनों को बुनिए। 5. अकेलेपन को आध्यात्म में बदलिए। चिंतन, भजन, भगवन्नाम, हनुमान चालीसा, गीता, रामायण का पठन-पाठन — अब ये सिर्फ ग्रंथ नहीं, आपकी चिकित्सा बनेंगे। 6. ऐसे संगठनों से जुड़िए जो देश और धर्म की सेवा में लगे हुए हैं। अपने सनातन धर्म व सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार कीजिए। 7. मंदिरों से जुड़िए और अपने साथ अन्य लोगों को भी जोड़ीए सार्वजनिक रूप से कुछ ना कुछ छोटे-छोटे सांस्कृतिक व धार्मिक प्रोग्राम जैसे श्री रामायण पाठ, हनुमान चालीसा के पाठ इत्यादि करिए और समाज में धर्म के प्रति जागृति को बढ़ावा दीजिए। छोटे बच्चे और नौजवानों में धर्म और संस्कृति के प्रति आस्था को बढ़ावा दीजिए। सबसे बड़ी सच्चाई—बच्चे जीवन का अध्याय हैं, पूरा ग्रंथ नहीं। और जो माता-पिता, बच्चों के जाने के बाद अपने जीवन का नया अध्याय खोल लेते हैं —वही वास्तव में सर्वश्रेष्ठ माता-पिता कहलाते हैं। शून्य तब पीड़ा देता है जब हम उसे दुश्मन मानते हैं। और वही शून्य मोक्ष का द्वार बनता है जब हम उसे साधना बना लेते हैं। अतः अपने अकेलेपन को साधना बनाईए..।। * *स्वस्थ व प्रसन्न रहिए, आप सभी को सुप्रभात💐* 🕉️ *जयश्री सीताराम*

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Comments (2)

Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Feb 2, 2026

जय भोले नाथ जी 🙏

poonam sharma poonam

poonam sharma poonam

Feb 2, 2026

Om Namah Shivay 🙏🏻🌹