
SHREE SHARMA
463 days ago
॥श्रीकृष्णाष्टकम्॥ भजे व्रजैकमण्डनं समस्तपापखण्डनं स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव नन्दनन्दनम्। सुपिच्छगुच्छमस्तकं सुनादवेणुहस्तकं अनङ्गरङ्गसागरं नमामि कृष्णनागरम्॥१॥ व्रज-भूमिके एकमात्र आभूषण, समस्त पापोंको नष्ट करनेवाले तथा अपने भक्तोंके चित्तोंको आनन्दित करनेवाले नन्दनन्दनको सर्वदा भजता हूँ, जिनके मस्तकपर मनोहर मोरपंखका मुकुट है, हाथोंमें सुरीली बाँसुरी है तथा जो काम-कलाके सागर हैं, उन नटनागर श्रीकृष्णचन्द्रको नमस्कार करता हूँ॥१॥ मनोजगर्वमोचनं विशाललोललोचनं विधूतगोपशोचनं नमामि पद्मलोचनम्। करारविन्दभूधरं स्मितावलोकसुन्दरं महेन्द्रमानदारणं नमामि कृष्णवारणम्॥२॥ कामदेवका मान मर्दन करनेवाले, बड़े-बड़े सुन्दर नेत्रोंवाले तथा व्रजगोपोंका शोक हरनेवाले कमलनयन भगवान् को नमस्कार करता हूँ, जिन्होंने अपने करकमलोंपर गिरिराजको धारण किया था तथा जिनकी मुस्कान और चितवन अति मनोहर है, देवराज इन्द्रका मान मर्दन करनेवाले उन श्रीकृष्णरूपी गजराजको नमस्कार करता हूँ॥२॥ कदम्बसूनकुण्डलं सुचारुगण्डमण्डलं व्रजाङ्गनैकवल्लभं नमामि कृष्णदुर्लभम्। यशोदया समोदया सगोपया सनन्दया युतं सुखैकदायकं नमामि गोपनायकम्॥३॥ जिनके कानोंमें कदम्ब-पुष्पोंके कुण्डल हैं, परम सुन्दर कपोल हैं तथा व्रजबालाओंके जो एकमात्र प्राणाधार हैं, उन दुर्लभ कृष्णचंद्रको नमस्कार करता हूँ; जो गोपगण और नन्दजीके सहित अतिप्रसन्ना यशोदाजीसे युक्त हैं और एकमात्र आनन्ददायक हैं, उन गोपनायक गोपालको नमस्कार करता हूँ॥३॥ सदैवपादपङ्कजं मदीयमानसे निजं दधानमुत्तमालकं नमामि नन्दबालकम्। समस्तदोषशोषणं समस्तलोकपोषणं समस्तगोपमानसं नमामि नन्दलालसम्॥४॥ जिन्होंने अपने चरणकमलोंको मेरे मनरूपी सरोवरमें स्थापित कर रखा है, उन अति सुन्दर अलकोंवाले नन्दकुमारको नमस्कार करता हूँ तथा समस्त दोषोंको दूर करनेवाले समस्त लोकोंका पालन करनेवाले और समस्त व्रजगोपोंके हृदय तथा नन्दजीकी लालसारूप श्रीकृष्णचन्द्रको नमस्कार करता हूँ॥४॥ भुवो भरावतारकं भवाब्धिकर्णधारकं यशोमतीकिशोरकं नमामि चित्तचोरकम्। दृगन्तकान्तभङ्गिनं सदासदालसङ्गिनं दिने दिने नवं नवं नमामि नन्दसम्भवम्॥५॥ भूमिका भार उतारनेवाले संसारसागरके कर्णधार मनोहर यशोदाकुमारको नमस्कार करता हूँ; अति कमनीय कटाक्षवाले, सदैव सुन्दर भूषण धारण करनेवाले नित्य नूतन नन्दकुमारको नमस्कार करता हूँ॥५॥ गुणाकरं सुखाकरं कृपाकरं कृपापरं सुरद्विषन्निकन्दनं नमामि गोपनन्दनम्। नवीनगोपनागरं नवीनकेलिलम्पटं नमामि मेघसुन्दरं तडित्प्रभालसत्पटम्॥६॥ गुणोंके भण्डार, सुखसागर, कृपानिधान और कृपालु गोपालको, जो देव शत्रुओंको ध्वंस करनेवाले हैं, नमस्कार करता हूँ; नित्य नूतन लीलाविहारी, मेघश्याम नटनागर गोपालको, जो बिजलीकी-सी आभावाला अति सुन्दर पीताम्बर धारण किये हुए हैं, नमस्कार करता हूँ॥६॥ समस्तगोपनंदनं हृदम्बुजैकमोदनं नमामि कुञ्जमध्यगं प्रसन्नभानुशोभनम्। निकामकामदायकं दृगन्तचारुसायकं रसालवेणुगायकं नमामि कुञ्जनायकम्॥७॥ जो समस्त गोपोंको आनन्दित करनेवाले और हृदयकमलको विकसित करनेवाले, देदीप्यमान सूर्यके समान शोभायमान हैं, उन कुंजमध्यवर्ती श्यामसुन्दरको नमस्कार करता हूँ। जो कामनाओंको भलीभाँति पूर्ण करनेवाले हैं, जिनकी चारु चितवन बाणोंके समान है, सुमधुर वेणु बजाकर गान करनेवाले उन कुंजनायकको नमस्कार करता हूँ॥७॥ विग्दध-गोपिकामनो-मनोज्ञ-तल्पशायिनं नमामि कुञ्ज कानने प्रवृद्धवह्निपायिनम्। किशोरकान्ति रञ्जितं दृगञ्जनं सुशोभितं गजेन्द्रमोक्षकारिणं नमामि श्रीविहारिणम्॥८॥ चतुर गोपिकाओंके मनरूपी सुकोमल शय्यापर शयन करनेवाले तथा कुंजवनमें बढ़ती हुई दावाग्निको पान कर जानेवाले, किशोरावस्थाकी कान्तिसे सुशोभित अंजनयुक्त सुन्दर नेत्रोंवाले, गजेन्द्रको ग्राहसे मुक्त करनेवाले, श्रीजीके साथ विहार करनेवाले श्रीकृष्णचंद्रको नमस्कार करता हूँ॥८॥ यदा तदा यथा तथा तथैव कृष्णसत्कथा मया सदैव गीयतां तथा कृपा विधीयताम्। प्रमाणिकाष्टकद्वयं जपत्यधीत्य यः पुमान् भवेत्स नन्दनन्दने भवे भवे सुभक्तिमान्॥८॥ प्रभो! मेरे उपर ऐसी कृपा हो कि जब-तब जैसी भी परिस्थितिमें रहूँ, सदा आपकी सत्कथाओंका गान करुँ। जो पुरुष इन दोनों प्रामाणिक अष्टको ने का पाठ या जप करेगा वह जन्म-जन्ममें नन्दनन्दन श्यामसुन्दरकी भक्तिसे युक्त होगा॥९॥ इति श्रीमच्छङ्कराचार्यकृतं श्रीकृष्णाष्टकं सम्पूर्णम् । 🙏जय श्रीकृष्ण 🌹🚩
Comments (2)

Rama Devi Sahu
May 24, 2025
Jai Shree Krishna 🙏🌹🌹

🙏Y.R Singh🙏
May 24, 2025
Jay Shri Radhekrishna
