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- गोवर्धन पर्वत परिक्रमा* ⛰️🙏 गोवर्धन पर्वत* की पूरी 21 किमी की परिक्रमा का है। मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों को बचाने के लिए 7 दिन तक इसी गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। *Start Point: दानघाटी - गिरिराज महाराज मंदिर* यहीं से परिक्रमा शुरू होती है और यहीं खत्म। *परिक्रमा मार्ग के प्रमुख स्थान क्रम से:* *1. गिरिराज महाराज - दानघाटी* परिक्रमा का प्रारंभ यहीं से होता है। यहाँ कृष्ण जी गोप-गोपियों से "दान" मांगते थे। *2. आन्यौर गाँव* कृष्ण कालीन गाँव। यहाँ परिक्रमा के दौरान विश्राम किया जाता है। *3. पुछरी का लौठ* मान्यता है कि यहाँ कृष्ण जी ने गायों की पूंछ पकड़कर उन्हें बचाया था। *4. श्रीनाथजी महाराज मंदिर* गोवर्धन का सबसे प्रसिद्ध मंदिर। यहाँ श्रीनाथजी की 7 फीट ऊंची मूर्ति है। *5. मानभंग* राधा-कृष्ण के मान-मनौवल से जुड़ी जगह। *6. सुरभीकुण्ड* कामधेनु गाय ने यहाँ कृष्ण का अभिषेक किया था। *7. जातिपुरा मुखारबिंद* गिरिराज जी का "मुख" माना जाता है। यहाँ गिरिराज जी के मुख के दर्शन होते हैं। *8. चूड़ल टेका* पर्वत की सबसे ऊंची चोटी। यहाँ से पूरा ब्रज दिखता है। *9. उद्धव कुण्ड* उद्धव जी ने यहाँ तपस्या की थी। *10. राधा कुण्ड / श्याम कुण्ड* सबसे पवित्र कुण्ड। मान्यता है यहाँ स्नान करने से राधा-कृष्ण जैसी भक्ति मिलती है। कार्तिक में लाखों लोग यहाँ डुबकी लगाते हैं। *11. कुसुम सरोवर* राधा-कृष्ण की लीलाओं का स्थान। बहुत सुंदर घाट है। *12. मुकुट मुखारबिंद* यहाँ गिरिराज जी के "मुकुट" के दर्शन होते हैं। *13. मानसी गंगा* इसे छोटी गंगा भी कहते हैं। परिक्रमा खत्म करने से पहले यहाँ स्नान करना जरूरी माना जाता है। *परिक्रमा से जुड़ी खास बातें:* 1. *दूरी*: करीब 21 किमी, पैदल 6-8 घंटे लगते हैं 2. *समय*: सुबह 4 बजे से शुरू कर दें तो दिन में आराम से हो जाती है 3. *नियम*: परिक्रमा में जूते-चप्पल नहीं पहनते, नंगे पैर चलते हैं 4. *प्रसाद*: रास्ते में "गिरिराज जी की चरणामृत" और "मिश्री" का प्रसाद मिलता है *"गोवर्धन महाराज की जय"* 🙏

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