
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
200 days ago
*रावण द्वारा कराया गया होम* *जब भगवान श्रीराम भारत के दक्षिणी छोर रामेश्वरम पहुँचे, तब उन्हें निश्चित रूप से पता चल चुका था कि देवी सीता लंका में हैं। अब उनका अगला कदम था—या तो राजनय (diplomacy) से उन्हें वापस लाना या फिर युद्ध करना।* *इस विशाल अभियान से पहले भगवान राम को हिंदू परंपरा के अनुसार एक विशेष यज्ञ (होम) करना था, ताकि भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त हो सके। वनर सेना के साथ यह अत्यंत आवश्यक था।* *🔥 लेकिन एक बड़ी अड़चन थी…* *यज्ञ की सारी तैयारियाँ हो चुकी थीं, सिवाय एक चीज़ के— एक योग्य ब्राह्मण आचार्य का मिलना, जो यह यज्ञ करवा सके।* *और भगवान राम स्वयं यह यज्ञ नहीं करा सकते थे क्योंकि—* *वे क्षत्रिय थे।* *वे ही कर्त्ता (Karta) थे।* *बहुत सोच-विचार के बाद भगवान राम ने एक अविश्वसनीय निर्णय लिया—* *उन्होंने हनुमानजी को लंका भेजा, यह अनुरोध लेकर कि रावण स्वयं रामेश्वरम आए और यज्ञ करवाए।* *वानर सेना यह सुनकर स्तब्ध रह गई।* *लेकिन यही राम का धर्म था—श्रेष्ठ कर्म किसी भी द्वेष से ऊपर।* *🐒 हनुमान जाते हैं रावण के पास* *हनुमानजी, जो राम के प्रति पूर्णतः समर्पित थे, आदेश मानते हुए लंका पहुँचे।* *वहाँ संदेश सुनकर सब अचंभित रह गए—स्वयं शत्रु राम ने रावण को न्योता भेजा है!* *👑 रावण का अप्रत्याशित निर्णय* *सभी को चौंकाते हुए रावण ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया।* *क्यों?* *क्योंकि वह भगवान शिव का अत्यंत बड़ा भक्त था।* *क्योंकि शिव पूजा/होम का निमंत्रण वह कभी नहीं ठुकरा सकता था—even यदि वह उसके परम शत्रु से क्यों न आया हो।* *और वह स्वयं एक अत्यंत ज्ञानी पंडित था।* *🔥 रावण रामेश्वरम पहुँचता है* *रावण हनुमान संग रामेश्वरम पहुँचा। तैयारियाँ देखकर उसने राम से कहा—* *“राजकुमार, यह सारी व्यवस्था अद्भुत है, पर एक बड़ी कमी है— आप अपनी पत्नी सीता के बिना होम पर बैठ ही नहीं सकते।”* *सब लोग स्तब्ध हो गए। सन्नाटा छा गया।* *श्रीराम शांत स्वर में बोले—* *“रावण, तुम महान पंडित हो। इस समस्या का समाधान भी तुम्हीं बताओ।”* *रावण ने उत्तर दिया—* *“मैं शिव होम में कोई विघ्न नहीं डाल सकता।* *इसलिए मैं देवी सीता को सिर्फ यज्ञ की अवधि के लिए यहाँ लाता हूँ,* *और फिर यज्ञ समाप्त होते ही उन्हें वापस लंका ले जाऊँगा।”* *और उसने ऐसा ही किया। यज्ञ भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।* *🌺 यज्ञ के बाद…* *जाते समय राम ने रावण से पूछा—* *“तुम्हारी दक्षिणा क्या होगी?”* *रावण ने कहा कि उसने कभी कुछ नहीं माँगा था—सिवाय सीता के। लेकिन जब राम ने आग्रह किया, तब रावण बोला—* *“हे श्रीराम, जब मेरा अंतिम समय आए,* *तब आप मेरे सिरहाने खड़े रहना। बस यही मेरा पारिश्रमिक है।”* *और जब रावण के अंतिम क्षण आए—* *राम स्वयं उसके पास खड़े रहे।* *🌼 यही कारण है…* *कि मृत्यु के समय “हे राम” कहना मोक्षदायक माना गया।* *कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द भी “हे राम” थे।* *उत्तर भारत में अंतिम यात्रा के समय लोग कहते हैं—* *“राम नाम सत्य है।”*

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