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मुदा करात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं कलाधरावतंसकं विलासिलोकरञ्जकम्। अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं नताशुभाशुनाशकं नमामि तं विनायकम्॥ *ॐ गणेशाय नमः*🌹

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Lal  Singh 🇮🇳🇮🇳

Lal Singh 🇮🇳🇮🇳

Mar 11, 2026

यह श्री गणेश पञ्चरत्नम् (Shri Ganesha Pancharatnam) की पहली और बहुत ही सुंदर पंक्ति है। इसकी रचना आदि शंकराचार्य जी ने की थी। इस श्लोक का अर्थ भगवान गणेश के अद्भुत स्वरूप और उनकी कृपा को दर्शाता है: * मुदा करात्तमोदकं: जो बड़ी प्रसन्नता के साथ अपने हाथों में 'मोदक' धारण करते हैं। * सदा विमुक्तिसाधकं: जो हमेशा मुक्ति (मोक्ष) का मार्ग प्रशस्त करने वाले हैं। * कलाधरावतंसकं: जिनके मस्तक पर चंद्रमा (कलाधर) आभूषण की तरह सुशोभित है। * विलासिलोकरञ्जकम्: जो इस जगत को आनंद और प्रसन्नता प्रदान करने वाले हैं। * अनायकैकनायकं: जिनका कोई स्वामी नहीं है, किंतु जो स्वयं सबके स्वामी (नायक) हैं। * विनाशितेभदैत्यकं: जिन्होंने गजमुखासुर जैसे दैत्यों का विनाश किया। * नताशुभाशुनाशकं: जो अपने भक्तों के अशुभ और दुखों का शीघ्र नाश कर देते हैं। * नमामि तं विनायकम्: ऐसे भगवान श्री 'विनायक' को मैं नमन करता हूँ। 🌺 गणपति बप्पा मोरया! 🌺 भगवान गणेश आपके जीवन से सभी विघ्नों को दूर करें और आपको सुख-समृद्धि प्रदान करें।